आजमगढ़ जिले में 150 से अधिक कोचिंग सेंटर, सिर्फ 50 का ही पंजीकरण, नियमों की उड़ रही धज्जियां

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आजमगढ़ , उत्तर प्रदेश ,

रिपोर्ट_____SP त्रिपाठी

– बिना रजिस्ट्रेशन और मानकों के बेसमेंट में चल रहे कोचिंग सेंटर

– जांच के नाम पर खानापूर्ति, अग्निशमन मानकों की खुली अनदेखी

आजमगढ़। जिले में कोचिंग संस्थानों के संचालन को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक 150 से अधिक कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं, जबकि जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय में मात्र 50 कोचिंग सेंटर ही पंजीकृत हैं। शेष कोचिंग सेंटर बिना पंजीकरण और मानकों की अनदेखी करते हुए संचालित किए जा रहे हैं। वहीं पड़ताल में सामने आया कि अधिकांश कोचिंग सेंटर बेसमेंट में चल रहे हैं, जहां सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। शासन द्वारा कोचिंग सेंटरों के संचालन के लिए स्पष्ट नियम निर्धारित किए गए हैं, जिनमें पंजीकरण, अग्निशमन विभाग से एनओसी, अग्निशमन उपकरण, योग्य शिक्षक, उचित बैठने की व्यवस्था, शौचालय, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, पार्किंग और स्वच्छता जैसे मानक शामिल हैं। इसके बावजूद जिले में इन मानकों की व्यापक अनदेखी की जा रही है। सिविल लाइन, रैदोपुर, कालीचौरा, डीएवी पीजी कॉलेज के पास बांध क्षेत्र तथा सिधारी सहित कई इलाकों में बेसमेंट में कोचिंग सेंटरों का संचालन किया जा रहा है, जिससे किसी भी संभावित दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जांच के नाम पर संबंधित विभाग केवल औपचारिकता पूरी करते हैं, जबकि वास्तविक कार्रवाई नहीं की जाती। न तो अग्निशमन विभाग और न ही शिक्षा विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण किया जा रहा है।

*500 से एक हजार तक वसूले जा रहे रुपये*

गणित, साइंस व अन्य महत्वपूर्ण विषयों को पढ़ाने के लिए संचालक 500 से एक हजार रुपये वसूल रहे हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। मनमाने तरीके से वसूली किए जाने के सवाल पर संचालक कोई भी बोलने से इन्कार कर रहे हैं।

*इन स्थानों पर सबसे अधिक संचालित हो रहे कोचिंग सेंटर*

आजमगढ़। शहर के सिविल लाइन, सिधारी हाइडिल, शाहगढ़ रोड़, रैदोपुर, एलवल मोहल्ला, काली चौरा, पहाड़पुर, ब्रह्मस्थान व बेलइसा में सबसे अधिक कोचिंग सेंटरों का संचालन किया जाता है। इनमें से सबसे ज्यादा कोचिंग संस्थान बेसमेंट में संचालित किए जा रहे हैं। यह जानकारी विभाग को भी है। पर विभागीय अधिकारी सिर्फ कोचिंग सेंटरों की लिस्ट बनाकर बैठे हैं। चर्चा तो यहां तक है कुछ कोचिंग संस्थान विभागीय अधिकारियों की भी नहीं सुन रहे हैं।

*कोचिंग खोलने के लिए ये मानक अनिवार्य*

– कोचिंग में उतने ही बच्चों को बैठाया जाए जितनी सीटें हों।

– हर कमरे में दो दरवाजे होने चाहिए और सीसीटीवी कैमरा।

– पार्किंग की सुचारु व्यवस्था होनी चाहिए।

– कोचिंग में लड़के एवं लड़कियों के लिए अलग वॉश रूम हो।

– इमरजेंसी अलार्म का होना जरूरी है।

– कोचिंग क्लास बेसमेंट में है तो वहां भी दो दरवाजे होने जरूरी हैं।

प्रभारी डीआईओएस मनोज कुमार ने बताया कि अभियान चलाकर कोचिंग सेंटर की जांच की जाएगी। जो बिना पंजीकरण होगा, उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। विभाग में करीब 50 कोचिंग सेंटर का पंजीकरण हैं।

मुख्य अग्निशमन अधिकारी विवेक शर्मा ने बताया कि

जिले में 20 कोचिंग सेंटरों ने विभाग से एनओसी ली है। कार्रवाई की बात की जाए तो हमारे अंडर में 500 वर्गमीटर और 15 मीटर ऊंची बिल्डिंग आती हैं। इसलिए कार्रवाई का अधिकारी हमारे कार्यक्षेत्र से बाहर है।

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