उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जहाँ एक ओर राज्य के चहुंमुखी विकास के लिए बिना रुके और बिना थके लगातार करोड़ों रुपये की सौगातें दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विद्युत विभाग के पूर्वांचल के अधिकारी अपनी ‘बंदरबांट’ के चक्कर में इस रफ्तार पर ब्रेक लगाते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला सीधे मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर क्षेत्र से सामने आया है, जहाँ बिजली विभाग की सिविल इकाई की लापरवाही और आपसी खींचतान का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है।
क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए नए बिजलीघरों के निर्माण और पुराने बिजलीघरों को चुस्त-दुरुस्त करने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत वाले करीब 17 टेंडर जारी किए गए थे। लेकिन अधिकारियों के आपसी तालमेल की कमी और कथित बंदरबांट के चलते इन सभी टेंडरों को एक साथ निरस्त कर दिया गया है। ये टेंडर गोरखपुर जानपद इकाई द्वारा जारी किए गए थे, लेकिन जानपद के ही मुख्य अभियंता कार्यालय ने इन पर कैंची चला दी। इस सामूहिक निरस्तीकरण से
कार्यदायी कंपनियों के मुखियाओं में हड़कंप मच गया है।
इन 17 प्रमुख टेंडरों पर चली ‘विभागीय कैंची’
विद्युत आपूर्ति से जुड़े जिन 17 टेंडरों को निरस्त किया गया है, उनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्र शामिल हैं:
गोरखपुर मंडलः बड़हलगंज, कार्यशाला केंद्र, भंडार केंद्र तथा नौसढ़ (33/11 केवी विद्युत उपकेन्द्र)।
बस्ती मंडलः बभनान, एकडेंगवा, महसों, विजिलेंस, खानतारा, खेसरहा, मालवीय रोड और विक्रमजोत।
महाराजगंजः निचलौल और समरधीरा।
सिद्धार्थनगरः नौगढ़ और लोटन।
देवरियाः हेतिमपुर (33/11 केवी विद्युत उपकेन्द्र)।
स्वीकृत टेंडर भी बढ़ा रहे ‘साहब’ की अलमारी की शोभा
एक तरफ जहाँ 17 टेंडर निरस्त कर दिए गए, वहीं दूसरी तरफ गोरखपुर जानपद इकाई के अधिशासी अभियंता कार्यालय में कुछ ऐसे भी बिजलीघरों के निर्माण के टेंडर हैं, जिनका विभागीय कोरम पूरी तरह पूरा हो चुका है। इसके बावजूद ये फाइलें धरातल पर उतरने के बजाय साहब की अलमारी की शोभा बढ़ा रही हैं।