मातृ ऋण से मनुष्य कभी मुक्त नहीं होता। डा राजलक्ष्मी राय

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वाराणसी । मातृ दिवस के अवसर पर महिला भूमिहार समाज की महिलाओ सम्मानित सदस्यों ने इस दिन की खुशियां वृद्ध माताओं के साथ साझा किया और कुछ वक्त उनके साथ बिताया।
महिला भूमिहार समाज की संस्थापिका डॉक्टर राजलक्ष्मी राय ने कहा कि “वृद्ध माताओं के साथ हंसी खुशी के कुछ पल बिताना हमारा सौभाग्य है।
मातृ ऋण से मनुष्य कभी मुक्त नहीं होता।”

समाज की महिलाओं ने मिलकर माताओं के साथ समय बिताया, उन्हें भोजन कराया और साथ ही भजन ,कीर्तन किया ।इस अवसर पर पूनम सिंह, डॉ.मंजुला चौधरी, किरन सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर पर भी माताओं से बातचीत किया। भारतीय सेना की मातृशक्ति और साहसी सैनिकों के जोश और जज्बे को सराहा।

अपनों से दूर आश्रम में रह रही माताओं के चेहरे पर खुशियों की चमक और आंखों में नमी देखकर ,मुन्नवर राणा की लिखी चंद पंक्तियां याद आ जाती हैं

“इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
मां बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है”

कार्यक्रम में बंदना सिंह,सोनी राय, विजयता राय,प्रतिमा सिंह,पूनम सिंह,चंद्रकला राय ,सरिता राय,बबीता राय,नीलिमा, सीमा,माया,सुषमा,अंकिता,खुशबू,अनिता आदि महिलाएं उपस्थित रहीं।

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