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पॉलिटेक्निक के पूर्व चेयरमैन कमलेश कुमार सिंह के सक्रियता से शासन द्वारा चयन प्रक्रिया को किया निरस्त - Saty Savera

पॉलिटेक्निक के पूर्व चेयरमैन कमलेश कुमार सिंह के सक्रियता से शासन द्वारा चयन प्रक्रिया को किया निरस्त

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रिपोर्ट-एजाज अहमद के साथ मु० सरफराज

 

उत्तर प्रदेश के जनपद बलिया से है जहा टाउन पॉलिटेक्निक बलिया में प्रबंध समिति द्वारा टाउन पॉलिटेक्निक में विभिन्न पदों के लिए शुरू की गयी चयन प्रक्रिया के तहत चयन किये गये कुल 7 व्याख्याता के चयन को शासन ने निरस्त कर दिया है। शासन ने इस चयन में धांधली की शिकायतों की जिलाधिकारी बलिया से जांच कराने के बाद मिली जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्यवाही की है। अब पुनः चयन प्रक्रिया शुरू की जायेगी।

बता दे कि नियुक्तियों में धांधली की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। खबर को तब पूर्व चेयरमैन टाउन पॉलिटेक्निक कमलेश सिंह के द्वारा शासन को की गयी शिकायतों को बल मिला था। श्री सिंह ने शासन को शिकायती पत्र भेजकर चयन प्रक्रिया में जमकर रिश्वतखोरी और अपने चहेते अभ्यर्थियों के चयन का आरोप लगाया था। श्री सिंह ने यह भी आरोप लगाया था कि चेयरमैन राजीव कुमार बिना प्रबंध समिति के प्रस्ताव के ही चयन प्रक्रिया में अपने चहेतो को फायदा पहुंचाने के लिए कार्य कर रहे है। श्री सिंह ने शासन को लगभग 23 बिन्दुओ वाला शिकायती पत्र भेजा था।

श्री सिंह की शिकायत को गंभीर मानते हुए शासन ने प्रबंध समिति के चेयरमैन को बर्खास्त करते हुए चयन को शून्य घोषित करते हुए इसके लिए जिम्मेदारों पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश जारी किया। इस आदेश के खिलाफ चेयरमैन राजीव कुमार ने माननीय प्रयागराज उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दायर करके शासन के आदेश को निरस्त करने की मांग की। माननीय न्यायालय ने याचिका कर्ता और सरकार के पक्षो को जानने के बाद चेयरमैन राजीव कुमार के बर्खास्तगी वाले आदेश को यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि शासन ने बर्खास्तगी के लिए कोई कारण नहीं बताया है। लेकिन माननीय न्यायालय ने नियुक्तियों को शून्य घोषित करने के शासन के आदेश पर कोई भी आदेश जारी करने से इंकार कर दिया। साथ ही चेयरमैन को बर्खास्त करने के लिए सरकार को समुचित कारणों के साथ आदेश जारी करने के लिए स्वतंत्र भी कर दिया।

चेयरमैन राजीव कुमार ने इस फैसले के बाद माननीय लखनऊ खंडपीठ की डबल बेंच में याचिका दायर कर चयनित व्याख्याताओं को निदेशक प्राविधिक शिक्षा परिषद से अनुमोदन देने हेतु आदेश जारी करने का अनुरोध किया। जिसकी सुनवाई के बाद माननीय न्यायालय ने प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा परिषद को दो सप्ताह में नियुक्तियों पर निर्णय कर माननीय न्यायालय को अवगत कराने का आदेश दिया और इस केस के लिए 4 दिसंबर 2023 को अगली तिथि नियत की।

माननीय न्यायालय के आदेश के बाद शासन ने जिलाधिकारी बलिया से प्राप्त जांच आख्या के आधार पर चयन में पारदर्शिता न होने और नियमों का पूर्णतया पालन न होने के कारण चयन किये गये सभी सात व्याख्याताओं के चयन को निरस्त करते हुए प्रबंध समिति को इन नियुक्तियों के लिए चयन प्रक्रिया फिर से शुरू करने का आदेश दिया है।

बलिया।। टाउन पॉलिटेक्निक बलिया में प्रवक्ताओ की नियुक्ति में भ्रष्टाचार की पूर्व चेयरमैन कमलेश सिंह द्वारा की गयी शिकायत के आधार पर शासन द्वारा 13 अक्टूबर 2023 को जारी प्रबंध समिति को भंग कर कंट्रोलर बैठाने, नियुक्तियों को शून्य करते हुए जांच शुरू कराने, दोषियों पर एफआईआर कराने, संस्थान के खातों से धन आहरण पर रोक लगाने के लिये निदेशक प्राविधिक शिक्षा परिषद कानपुर को दिया गया था। इस आदेश के खिलाफ टाउन पॉलिटेक्निक बलिया की प्रबंध समिति के चेयरमैन राजीव कुमार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय प्रयागराज की लखनऊ खंड पीठ में एक याचिका संख्या 9339 दाखिल की गयी थी और 13.10.23 के शासन द्वारा जारी आदेश को निरस्त करने की मांग की गयी थी।

इसी याचिका पर दिनांक 27.10.23 को माननीय न्यायाधीश श्री अब्दुल मोईन की अदालत में याचिकाकर्त्ता के अधिवक्ता श्री एलपी मिश्रा और सरकार की तरफ से चीफ स्टैंडिंग कॉउंसलिंग और कमलेश सिंह के अधिवक्ता श्री अमरेंद्र नाथ त्रिपाठी द्वारा अपनी अपनी दलीले पेश की गयी। याचिका कर्ता के अधिवक्ता जहां 13.10.23 के जारी आदेश को निरस्त कर याचिका स्वीकार करने की मांग माननीय कोर्ट से की, तो वही सरकार व कमलेश सिंह के अधिवक्ताओ ने याचिका को ख़ारिज करने की पुरजोर मांग की। दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से शुरू यह बहस 12 बजकर 55 मिनट पर समाप्त हुई। लेकिन इसका फैसला 30 अक्टूबर 2023 को दोपहर बाद जारी हुआ।

माननीय न्यायालय ने एक तरफ जहां राज्य सरकार द्वारा अपनी आपात कालीन शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्रबंध समिति को भंग करने के आदेश को, भंग करने के लिये कारण न दर्शाने के कारण निरस्त कर दिया। वही नियुक्तियों को शून्य कर सरकार द्वारा की जा रही जांच में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया। माननीय न्यायालय ने कहा कि नियुक्तियों में अनियमितता की शिकायतें सरकार को मिली है और इसकी जांच चल रही है। ऐसे में इस प्रकरण में न्यायालय कोई भी निर्देश जारी करने का कोई भी औचित्य नहीं समझ रहा है। यानी शासन द्वारा नियुक्तियों को शून्य कर जो जांच की जा रही है, वह जारी रहेगी। इस आदेश से चयनित अभ्यर्थियों को ज्वाइन कराने के लिये अभी प्रबंध समिति को और अभ्यर्थियों को इंतजार करना पड़ेगा। माननीय न्यायालय के आदेश को अलग अलग रूप में लिया जा रहा है। श्री कमलेश सिंह के अधिवक्ता श्री अमरेंद्र नाथ त्रिपाठी ने कहा है कि वास्तव में यह आदेश 13.10.23 के आदेश के कुछ भागों को ही निरस्त कर रहा है, शेष को माननीय कोर्ट ने यथावत छोड़ दिया है।

प्रबंध समिति को मिली है फ़ौरी राहत, अभी भी बर्खास्तगी का खतरा बरकरार

 

माननीय उच्च न्यायालय के आदेश से फ़ौरी तरह से चेयरमैन राजीव कुमार को तो अभी राहत मिल गयी है, लेकिन यह राहत मात्र शासन द्वारा जारी आदेश में कारण न बताने के कारण मिली है। शासन द्वारा अपना आदेश जारी करने के बाद उच्च स्तरीय जांच भी बैठायी गयी है, जिसकी रिपोर्ट शासन तक पहुंचने वाली है। इस रिपोर्ट के बाद एक बार फिर शासन अनियमितता मिलने पर अपनी आपातकालीन शक्तियों का प्रयोग कर प्रबंध समिति को भंग कर सकता है। बता दे कि इस नियुक्तियों में परीक्षा शुल्क दो खातों में लिया गया है। 2016 में प्रकाशित विज्ञापन के आधार पर परीक्षा शुल्क प्रधानाचार्य टाउन पॉलिटेक्निक बलिया के खाते में लिया गया है जबकि 2022 में जो विज्ञापन जारी हुआ है उसका शुल्क अध्यक्ष प्रबंध समिति, टाउन पॉलिटेक्निक बलिया के खाते में लिया गया है, जिसका संचालन अध्यक्ष राजीव कुमार द्वारा किया जाता है। जानकारी के अनुसार अध्यक्ष के नाम से बैंक खाता खोलने का प्रबंध समिति में कोई नियम नहीं है।

बलिया।। टाउन पॉलिटेक्निक बलिया में चल रही विभिन्न पदों के लिये नियुक्ति प्रक्रिया पर पूर्व चेयरमैन टाउन पॉलिटेक्निक बलिया कमलेश कुमार सिंह ने भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगाया है। श्री सिंह ने इसमें प्राविधिक शिक्षा परिषद कानपुर के निदेशक के राम के भी शामिल होने का आरोप लगा कर सनसनी फैला दी है। सोमवार को श्री सिंह ने इस संबंध में एक शिकायती पत्र जिलाधिकारी के प्रतिनिधि नगर मजिस्ट्रेट को सौपा है। साथ ही इस पत्र को माननीय मुख्यमंत्री जी व प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा परिषद लखनऊ को भी रजिस्टर्ड डाक द्वारा भेजा है। बता दे कि विभिन्न पदों के लिये चल रही नियुक्ति प्रक्रिया में अब तक मेकेनिकल विभाग में 7 व्याख्याताओं का चयन कर लिया गया है। जिसमे टेक्निकल बोर्ड के निदेशक कन्हैया राम के पुत्र राम प्रकाश और टेक्निकल बोर्ड के पूर्व सचिव व राजकीय पॉलिटेक्निक लखनऊ के प्रधानाचार्य राकेश वर्मा का पुत्र रमेश कुमार वर्मा का नाम भी शामिल है। यही नही इस नियुक्ति में टीडी कॉलेज के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और इस चयन प्रक्रिया में अवैध वसूली के लिये चर्चित शिवा शंकर चौबे (मान्यता प्राप्त पत्रकार भी ) के पुत्र अभिनव कुमार चौबे का भी नाम शामिल है, का आरोप श्री कमलेश कुमार सिंह ने लगाया है।श्री सिंह ने इस पूरी जांच प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच या एसटीएफ जांच की मांग की है।

अपने 22 सूत्रीय शिकायती पत्र में श्री सिंह ने जहां नियुक्ति के लिये जारी विज्ञापनों को ही त्रुटि पूर्ण कहा है, वही बिना अंतिम तिथि व बिना अखबारों में प्रकाशन के नियुक्ति को ही अवैध कहा है। कहा है कि प्रबंध समिति के चेयरमैन के पास बिना प्रबंध समिति द्वारा प्रस्ताव पारित करने के पहले कोई भी विज्ञापन निकालने का अधिकार ही नही है। श्री सिंह ने मेकेनिकल विभाग में –विशाल कुमार सिंह, अभिनव कुमार चौबे, रमेश कुमार वर्मा, राम प्रकाश और विश्व प्रकाश द्विवेदी तथा शशांक पांडेय प्रवक्ता भौतिकी और आनंद कुमार मिश्र प्रवक्ता गणित की नियुक्तियों की जांच की मांग की है। कहा है कि भ्रष्टाचार के चलते उच्च योग्यता धारियों की जगह कम न्यूनतम योग्यता धारियों को चयनित कर लिया गया है। कहा कि इस नियुक्ति में एकेडमिक प्राप्ताँक के आधार पर अंक देने के बाद साक्षात्कार के अंक जोड़े जाने थे, जो नही किया गया है।

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