यूं ही नहीं होती बिजली बिल में गड़बड़ी…‘सेटिंग’ का फंडा है ये; परेशान उपभोक्तों ने लगाए ये आरोप

1 / 100 SEO Score

रिपोर्ट-एजाज अहमद के साथ मु० सरफराज

 

उत्तर प्रदेश के जनपद बलिया से है ज़हा सिकन्दरपुर में कई विद्युत उपभोक्ता बिजली बिल कई गुना ज्यादा आने से परेशान हैं। उनका आरोप है कि बिजली बिलों में गड़बड़ी की जा रही है। अधिकारी के पास शिकायत लेकर जाते हैं तो वे टरका देते हैं। विद्युत निगम की कारस्तानी से सिकन्दरपुर के उपभोक्ता परेशान हैं। मीटर रीडर घर-घर जाकर रीडिंग नहीं ले रहे। मनमानी रीडिंग दर्ज कर बिल बना रहे हैं। यह लापरवाही या चूक नहीं है बल्कि जान बूझकर किया जा रहा है। जिन लोगों के हमेशा चार-पांच सौ रुपये के बिल आते रहे हैं, उनके पास आठ से 30 हजार के बिल पहुंच रहे हैं। लोगों का कहना है कि इसके पीछे की वजह यही है कि उपभोक्ता बिल सही कराने के लिए विभाग के चक्कर लगाएं और फिर थक-हार कर सुविधा शुल्क देकर काम कराएं।

 

बिजली बिल गड़बड़ आने पर जब उपभोक्ता अधिकारी के पास जाते हैं तो उन्हें जांच का आश्वासन देकर टरका दिया दाता है। जांच होती ही नहीं है।

 

उपभोक्ताओं ने तो यहां तक बताया कि विद्युत निगम में ही कुछ कर्मचारी यहां तक कहते हैं कि जब चक्कर काटकर थक जाओ तो हमारे पास आना काम करा देंगे। बात सही भी है थक-हारकर उपभोक्ता इन्हीं बाबुओं के पास जाकर इनकी जेब गर्म करके बिल सही कराते हैं। तब सारे काम फटाफट हो जाते हैं।उपभोक्ताओ ने बताया कि एक किलोवाट का कनेक्शन है। महीने में तीन-चार सौ रुपये का बिल आता है, लेकिन इस बार 20 हजार रुपये का बिल आ गया है। उपभोक्ता ने रोते हुए बताया कि इसकी शिकायत कई बार कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हो सकी। वह इतना बड़ा भुगतान कहां से करें। ऊपर से कर्मचारी कनेक्शन काटने की धमकी दे रहे हैं। निगम में शिकायत करने पर एक कर्मचारी ने तो यहां तक कहा कि सेटिंग कर लो, बिल ठीक हो जाएग।अपना अपना उपभोक्ताओं ने बताया कि उनके यहां प्रत्येक महीने 400-500 रुपये का बिल आता है, लेकिन इस बार आठ हजार रुपये का बिल आया है, जो बहुत अधिक है। अधिक बिल आने की शिकायत कई बार कर चुके हैं, लेकिन अफसर हर बार अगले सप्ताह आने को कहकर टहला देते हैं।

मीटर रीडर कर रहे खेल

बिलों में गड़बड़ी के लिए सीधे तौर पर मीटर रीडर जिम्मेदार हैं। दरअसल प्राइवेट एजेंसी के पास रीडिंग का जिम्मा है। एजेंसी अपने कर्मचारी लगाकर मीटरों की रीडिंग कराती है। इन मीटर रीडरों के तार विभाग के उन बाबुओं से जुड़े होते हैं, जहां रीडिंग की फीडिंग होती हैं। उपभोक्ता जब बड़े अधिकारी के पास जाता है तो उसे जेई के पास जाने को कहा जाता है।

 

जेई कहता है कि जितनी बिजली फूंकी होगी, उतना ही बिल आएगा। ज्यादा है तो मीटर चेक करा लो। मीटर चेक करने के जेई को प्रार्थना पत्र देकर रसीद कटवानी होती है, लेकिन इसके लिए भी उपभोक्ता की चप्पलें घिस जाती हैं। वसूली का सबसे बड़ा फंडा यह है कि कर्मचारी बिल सही करने पर कम और कनेक्शन काटने पर ज्यादा ध्यान देता है। ऐसे में ले-देकर उपभोक्ता जल्द से जल्द बिल सही कराने की जुगत में रहते हैं।

 

ऊर्जा निगम के एसडीओ अजय कुमार सरोज ने कहा कि कुछ उपभोक्ताओं के बिजली बिल अधिक आए हैं, जिनकी जांच कराई जा रही है। जांच के बाद ही पता चलेगा कि बिल अधिक किस वजह से आ रहे हैं। जो उपभोक्ता शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं, उनकी समस्या का समाधान कराया जा रहा है। उन्होने कहा कि अगर गलत बिल आउटसोर्सिट कर्मचारी के द्वारा निकल जा रही है तो जांच करवा कर इनके ऊपर कार्यवाही की जाएगी

Share

Leave a Reply