यूपी के बिजली मंत्री ए के शर्मा ने अपनी झल्लाहट उतारी है, लेकिन इसके बाद भी क्या सुधार होगा, कहना मुश्किल है।

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*लखनऊ*

यूपी के बिजली मंत्री ए के शर्मा ने अपनी झल्लाहट उतारी है, लेकिन इसके बाद भी क्या सुधार होगा, कहना मुश्किल है। क्यों कि 2 मुख्य बातें उन्होंने कही हैं जो समझने योग्य हैं।
1- वे यह खुद मानते हैं कि यूपी का पुलिस विभाग भ्रष्ट है, उसी की तरह उनका बिजली विभाग भी भ्रष्ट है।
2- उनका बिजली विभाग खुद उनके द्वारा संचालित नहीं हो रहा। ये बात बिजली मंत्री खुद कह रहे हैं।

*आज चेयरमैन से लेकर पूरे राज्य के एक्सियन तक की मीटिंग रखी थी।*

*पूरा दस मिनट बिजली के मुखिया UPPCL चेयरमैन और कुछ अधिकारियों को सुनने के बाद मंत्री बोले तो पूरा महकमा हिल गया…*

*मंत्री बोले*

1. आप लोग अपनी बकवास बंद करिए। मैं आपकी बकवास सुनने को नहीं बैठा हूँ।

2. नीचे ज़मीनी हकीकत एक दम अलग है। जानता को फेस करिए तब मालूम पड़ेगा। मैं कई जिलों का दौड़ा करके कल ही लौटा हूँ।

3. आप लोग अंधे, बहरे, काने होकर बैठे हो। जनता पर क्या बीत रही है और लोग क्या विभाग के बारे में क्या सोच रहे हैं यह आपको मालूम ही नहीं।

4. पुलिस से भी ख़राब काम है आप लोगों का। जो झूठी रिपोर्ट नीचे से आती है वही आप लोग ऊपर तक बताते हो।

5. बिजली विभाग कोई बनिया की दुकान नहीं है कि ख़ाली बिल के पैसे वसूलने के लिए काम करे। यह एक जन सेवा है। और हमें उस हिसाब से बर्ताव करना पड़ेगा।

6. पूरा फीडर या गाँव की लाइन काटने पर फटकारते हुए बोले कि उन उपभोक्ताओं की क्या गलती है जो समय से बिल भर रहे हैं। उनका जला हुआ ट्रांसफार्मर नहीं बदलना या उच्चीकरण नहीं करना कौन सा न्याय है।

7. लगता है बिजली विभाग ने हमें बदनाम करने के लिए सुपारी ले लिया है।

8. कंप्यूटर के जमाने में एक सामान्य आदमी का ७२ करोड़ रुपए का बिल आता है। और फिर उसे ठीक करने के लिए पैसा लेते हो तुम लोग।

9. ग़लत जगह विजिलेंस के छापे डाले जा रहे हैं। जहाँ बड़ी चोरी हो रही है वहाँ नहीं जाते। पैसा वसूली हो रही है FIR करने के नाम पर।

10. आज की ये सब बातें लिखी जाँय। मौखिक बोल-बोल कर मैं थक गया। आप लोग मीटिंग में हमारी बात सुनने के बाद कहीं और से संचालित होकर उल्टा ही करते हो।

11. अब ये सब नहीं चलेगा। मैं जनता के प्रति जवाबदेह हूँ। विधानसभा में जवाब देता हूँ। आपको किसने अधिकार दिया मनमानी करने का।

12. आप लोगों के ग़लत और असामयिक निर्णयों का ख़ामियाज़ा पूरा प्रदेश भुगत रहा है।

13. मेरे बार बार कहने के बावजूद आप लोग सतर्क नहीं हो रहे हो। जैसे संविदा कर्मियों को निकालने का विषय, फ़ोन उठाने का विषय, विद्युत दुर्घटनाओं का विषय।

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