आजमगढ़ निजामाबाद तहसील परिसर में तहसीलदार चमन सिंह राणा के सम्मान में आयोजित विदाई समारोह एक यादगार और भावुक पल बन गया। लेखपाल संघ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को बेहद भव्य और ऐतिहासिक स्वरूप दिया गया था। पूरा तहसील सभागार फूलों की सजावट और गुब्बारों से सराबोर था।
कार्यक्रम का शुभारंभ उपजिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह और तहसीलदार चमन सिंह राणा ने मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद सरस्वती वंदना की गई। कार्यक्रम का कुशल संचालन लेखपाल संघ के मंत्री लव राय ने किया। इस दौरान उपस्थित लेखपाल संघ के पदाधिकारियों और उपजिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने तहसीलदार को अंगवस्त्रम और स्मृति चिन्ह भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
तहसीलदार चमन सिंह राणा के 15 महीने के कार्यकाल की सराहना करते हुए वक्ताओं ने कहा कि वे अत्यंत मिलनसार और सहज व्यक्तित्व के धनी थे। अपनी कार्यशैली का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल में कभी भी किसी अधिवक्ता या आम नागरिक को उनके व्यवहार से कोई शिकायत नहीं रही। वह हर फरियादी की बात धैर्यपूर्वक सुनते थे और तत्काल निराकरण का प्रयास करते थे। माहौल भावुक हो गया। अपने संबोधन में चमन सिंह राणा की आवाज रुंध गई। उन्होंने कहा, “निजामाबाद में मुझे जो प्यार और सम्मान मिला है। उसे मैं कभी नहीं भूल सकता। यदि मेरे कार्यकाल में जाने-अनजाने में किसी को कष्ट पहुँचा हो तो मैं उसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ।” उन्होंने सभी कर्मचारियों को परिवार की तरह स्नेह देने के लिए आभार व्यक्त किया।मूल रूप से उत्तराखंड के देहरादून के निवासी चमन सिंह राणा ने अपनी 38 वर्षों की सेवा के दौरान अधिकांश समय सहारनपुर में बिताया। आजमगढ़ में उन्होंने दो वर्ष नौ महीने की सेवा दी। उनके परिवार में एक पुत्र, जो दिल्ली में बैंक सेवा में कार्यरत हैं। और एक पुत्री है जो उत्तराखंड में सेवा दे रही हैं।लेखपाल संघ ने तहसीलदार के प्रति अपना स्नेह और सम्मान प्रदर्शित करने के लिए उनकी विदाई को खास बनाया। जिस वाहन से तहसीलदार को विदा किया जाना था। उसे भी आकर्षक ढंग से फूलों और गुब्बारों से सजाया गया था। समारोह के समापन पर सामूहिक भोज का भी आयोजन किया गया। इस दौरान तहसील के तमाम कर्मचारी और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। जिनकी आंखें अपने प्रिय अधिकारी को विदा करते हुए नम दिखाई दीं।