सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने का वाक़िया अब सिर्फ़ मुक़ामी मामला नहीं रहा, बल्कि मुल्क के आईनी निज़ाम और क़ानून की हुकूमत पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। इसी संजीदगी को देखते हुए समाजवादी पार्टी के क़ौमी सदर और साबिक़ वज़ीर-ए-आला जनाब अखिलेश यादव जी ने पार्टी का वफ्द सहारनपुर भेजा।
वफ्द ने मौक़े पर पहुँचकर मुक़ामी लोगों और मुतास्सिरा फ़रीक़ से मुलाक़ात की और पूरे वाक़िये की जानकारी हासिल की। पार्टी का मुतालबा है कि इस मामले की ग़ैर-जानिबदार जाँच कर ज़िम्मेदार लोगों की पहचान की जाए और जिन अफ़सरान का किरदार सामने आता है तो उसके ख़िलाफ़ सख़्त क़ानूनी कार्रवाई की जाए।
किसी भी इबादतगाह के बारे में कार्रवाई हो तो वह आईन और क़ानूनी अमल के तहत ही होनी चाहिए। सत्ता और इंतिज़ामिया की ताक़त का इस्तेमाल किसी के साथ ज़ुल्म या नाइंसाफ़ी के लिए नहीं किया जा सकता।
इस वाक़िये ने मुल्क की गंगा-जमुनी तहज़ीब और आलमी सतह पर भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि को भी मुतास्सिर किया है। इसलिए समाजवादी पार्टी इस मामले को पूरी संजीदगी से ले रही है और सरकार बनने पर इसकी जाँच भी की जाएगी
जनाब अखिलेश यादव जी का यह क़दम साफ़ पैग़ाम है—ज़ुल्म के ख़िलाफ़ समाजवादी पार्टी खड़ी है और इंसाफ़ की लड़ाई आख़िरी दम तक जारी रहेगी।
कोई मुजरिम अगर आज बच भी गया, तो कल नहीं बचेगा।
क़ानून की हुकूमत और आईन की हिफ़ाज़त हर हाल में होगी।
मोहम्मद आरिफ शाह अल्वी