ठेंगहा में भागवत कथा का भव्य समापन, कृष्ण लीलाओं के वर्णन से भक्त हुए भाव-विभोर

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संग्रामपुर के ठेंगहा में जगदीश नारायण अग्रहरि के निज निवास पर चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का अंतिम दिवस अत्यंत भावपूर्ण और भक्तिरस से सराबोर वातावरण में सम्पन्न हुआ। कथा व्यास आचार्य शिव शंकर त्रिपाठी जी महाराज ने अंतिम दिवस की कथा में यदुवंश का मनोहर वर्णन, सुदामा चरित्र, भगवान दत्तात्रेय के चौबीस गुरुओं की प्रेरणादायक कथा, राजा नृग की कर्मफल प्रदर्शित करती लीला, भगवान श्रीकृष्ण के स्वधाम गमन का मार्मिक प्रसंग तथा परीक्षित मोक्ष की दिव्य कथा का विस्तृत एवं हृदयस्पर्शी वर्णन किया।

आचार्य जी ने यदुवंश की गौरवगाथा, श्रीकृष्ण–सुदामा की पवित्र मित्रता, दत्तात्रेय द्वारा प्रकृति से लिए गए जीवन-मूल्यों, राजा नृग की दान-संबंधी भूल से मिली सीख, श्रीकृष्ण के धाम गमन तथा शुकदेव जी के उपदेश से परीक्षित के मोक्ष — इन सभी गूढ़ अध्यात्म प्रसंगों को सरल, रोचक व भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत कर भक्तों को भक्ति रस में डुबो दिया। कथा समापन के दौरान वातावरण पूरी तरह भाव-विभोर हो उठा और उपस्थित श्रद्धालुओं ने धर्म, भक्ति और सदाचार का संदेश ग्रहण किया।

कार्यक्रम में श्रोता के रूप में जगदीश नारायण अग्रहरि, हुकुम चन्द्र, यज्ञ नारायण तिवारी, कुलदीप तिवारी, लक्ष्मी कांत, पुष्पराज सिंह, पप्पू ओझा, राम लखन, बजरंग प्रसाद, पवन मिश्र, विजय कुमार मिश्र, गया प्रसाद तिवारी, राधेश्याम तिवारी, हरिबक्स सिंह, गार्ड मिश्रा सहित क्षेत्र की बड़ी संख्या में महिलाएँ उपस्थित रहीं और श्रद्धापूर्वक कथा का श्रवण किया।

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