पहलगाम हमले के बाद भारत विरोधी टिप्पणी, असम में अब तक 42 लोग गिरफ्तार

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गुवाहाटी: असम में तीन और लोगों को कथित तौर पर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में रविवार को गिरफ्तार किया गया अधिकारियों ने बताया कि बारपेटा से अजीजुर्रहमान, होजाई से जोयनलुद्दीन और चिरांग से अशरफुल इस्लाम को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिये देश विरोधी टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. इसके साथ ही 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद देश विरोधी टिप्पणी करने के आरोप में असम में गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या 42 हो गई है.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया पोस्ट में गिरफ्तारी की पुष्टि की. गिरफ्तार लोगों को देशद्रोही करार देते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, “हमारी असम पुलिस लगातार ऐसे गद्दारों की पहचान करने और उन्हें हिरासत में लेने का अभियान चला रही है, जिन्होंने भारत में रहते हुए भी देश के खिलाफ बयानबाजी की है. रविवार को भी बारपेटा पुलिस ने अजीजुर्रहमान, होजाई पुलिस ने जोयनलुद्दीन और चिरांग पुलिस ने अशरफुल इस्लाम को गिरफ्तार किया. इसके साथ ही इस अभियान में गिरफ्तार लोगों की संख्या 42 हो गई है. अगर आपको कोई भी व्यक्ति इस तरह की देश विरोधी टिप्पणी करता दिखे तो प्रशासन को सूचित करें.”गौरतलब है कि देश विरोधी टिप्पणी के आरोप में अब तक सबसे अधिक पांच लोग बराक घाटी के कछार जिले में गिरफ्तार किए गए हैं और जेल में बंद हैं.असम में पंचायत चुनाव का मौसम है. 2 मई को राज्य के 14 जिलों में पहले चरण का मतदान होने के बाद दूसरे चरण का मतदान 7 मई को होगा. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा हेलीकॉप्टर से प्रचार में व्यस्त हैं.

किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा…

इस बीच, गोवालपारा जिले में चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने हाल ही में कहा था, “मैं उन लोगों की कानूनी तौर पर टांगें तोड़ दूंगा जो पाकिस्तान की तारीफ कर रहे हैं, जबकि यह भारत ही है जिसने उन्हें सब कुछ दिया है. किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा. हम उन्हें बर्दाश्त नहीं करेंगे. हमें जो भी करना होगा, हम कानून के दायरे में करेंगे. ताकि भविष्य में किसी को असम में रहकर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ कहने से पहले सौ बार सोचना पड़े.”

गिरफ्तार लोगों में विधायक भी शामिल

गौरतलब है कि असम में देश विरोधी टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए 42 लोगों में एक विधायक भी शामिल है. विपक्षी दल AIUDF के ढिंग विधानसभा क्षेत्र से विधायक अमीनुल इस्लाम को 24 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था. विधायक अमीनुल अब नगांव जिला जेल में बंद हैं।

® *_पाकिस्तान को सबक: चिनाब रिवर पर बने सलाल डैम के गेट बंद, सीमा पार जाने वाला पानी रुका_*

रियासी: पाकिस्तान की ओर बहने वाली चिनाब नदी पर जम्मू-कश्मीर के सलाल बांध के सभी द्वार बंद होने से रियासी जिले में जल स्तर में भारी गिरावट आ गई है. इसे सीमा पार के खिलाफ एक एक्शन के रूप में देखा जा रहा है. वहीं रामबन में चिनाब नदी पर बगलिहार जलविद्युत परियोजना बांध से पानी बहता देखा गया. इस पर बीजेपी ने पीएम मोदी की पाकिस्तान के खिलाफ की गई इस कार्रवाई पर खुशी जताई है.
सोशल साइट एक्स पर एक पोस्ट में बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने इस कार्रवाई के बाद पीएम नरेंद्र मोदी के एक्शन को सराहा है. उन्होंने लिखा, ‘भारत के हित में कठोर निर्णय लेने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत होती है और प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कार्यों के माध्यम से यह प्रदर्शित किया है. यह मोदी का सशक्त सिद्धांत है, जो आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में दृढ़ और अडिग है. हमारे नागरिकों का पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते. यह स्पष्ट होना चाहिए.’
पाकिस्तान की ओर जा रहे इस पानी को रोकने को लेकर लोकल निवासी दिनेश कहते हैं कि, ‘हमें खुशी है कि मोदी सरकार ने पाकिस्तान जाने वाले पानी को रोक दिया है. जिस तरह से पाकिस्तान ने पहलगाम में हमारे पर्यटकों का खून बहाया, उसका मुंहतोड़ जवाब मिलना चाहिए. सरकार जो भी फैसला लेगी, हम उसके साथ हैं.’
एक अन्य स्थानीय निवासी ने कहा, ‘यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है. सरकार का यह कदम बहुत अच्छा है. हमारी सरकार कई तरह से पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दे रही है. हम सब सरकार के साथ हैं.’
इसको लेकर उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने 28 अप्रैल को सिंधु जल संधि को स्थगित करने के निर्णय की भारत सरकार के कदम को सराहा था. धामी ने इसे पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक साहसिक कदम बताया था.

एएनआई से बात करते हुए सीएम धामी ने कहा कि आज का भारत दोस्ती-दुश्मनी दोनों निभाना जानता है. उन्होंने कहा, ‘पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह बहुत अच्छा फैसला है. खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते. आज का भारत दोस्ती और दुश्मनी दोनों निभाना जानता है.’

जान लें कि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पर 9 साल की बातचीत के बाद 1960 में हस्ताक्षर हुए थे. इस संधि की मध्यक्षता विश्व बैंक ने की थी. और इस संधि पर वो एक हस्ताक्षरकर्ता भी है.
सिंधु नदी जल संधि पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम, चिनाब को पाकिस्तान और पूर्वी नदियों रावी, ब्यास, सतलुज को भारत को आवंटित करती है. इसके साथ ही ये संधि प्रत्येक देश को दूसरे को आवंटित नदियों के कुछ उपयोग की अनुमति भी देती है। Front News India इस संधि के तहत भारत को सिंधु नदी प्रणाली से 20 फीसदी पानी और बाकी का बड़ा हिस्सा 80 प्रतिशत पाकिस्तान को देने पर सहमति थी.
बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ हमला साल 2019 के हुए पुलवामा हमले के बाद कश्मीर घाटी में हुए सबसे घातक हमलों में से एक है. पुलवामा हमले में 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए थे. वहीं पहलगाम आतंकी हमले में 26 टूरिस्ट मारे गए. भारत ने पहलगाम हमले के बाद सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने के लिए पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं. इसको लेकर सिंधु जल संधि को भारत ने स्थगित कर रखा है।

® *_पंजाब सीमा पर कंप्लीट ब्लैक आउट अभ्यास, पाकिस्तान में खलबली_*

फिरोजपुर: पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है. युद्ध की आशंकाओं और धमकियों के बीच, भारत ने एक बड़ा फैसला लिया है, जिसने सीमा पार पाकिस्तान में हलचल मचा दी है. दरअसल, पंजाब के फिरोजपुर में भारतीय सेना की छावनी में रविवार रात आधे घंटे के लिए पूर्ण ब्लैकआउट अभ्यास किया गया. इस कंप्लीट ब्लैक आउट एक्सरसाइज को संभावित युद्ध की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है. यह अभ्यास रात 9 बजे से 9.30 बजे तक चला, जिसमें पूरे क्षेत्र में पूर्ण अंधकार बनाए रखा गया. इस अभ्यास को सफल बनाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थानीय निवासियों से पूर्ण सहयोग की अपील की थी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस दौरान उनके घरों के बाहर कोई इन्वर्टर या जनरेटर लाइट दिखाई न दे.
क्यों किया गया यह अभ्यास?
सैन्य अधिकारियों द्वारा फिरोजपुर के डिप्टी कमिश्नर को लिखे पत्र में इस अभ्यास के उद्देश्य को स्पष्ट किया गया है. पत्र में कहा गया है कि इस रिहर्सल का मकसद मौजूदा युद्ध के खतरों के बीच ब्लैकआउट प्रक्रियाओं को लागू करने में तैयारी और प्रभावशीलता सुनिश्चित करना है. इस ड्रिल को पूरा करने से पहले कैंटोनमेंट अधिकारियों ने लाउडस्पीकर से घोषणा करते हुए आम लोगों को ब्लैकआउट अभ्यास में शामिल उपायों के बारे में जानकारी दी.
यह मॉक ड्रिल ऐसे समय में हो रही है जब भारत 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दे रहा है. पाकिस्तानी आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के लोकप्रिय पर्यटन स्थल पहलगाम में कम से कम 26 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी थी. इस घटना ने दोनों देशों के बीच संबंधों को और भी तनावपूर्ण बना दिया है.
क्या होता है ब्लैकआउट और क्यों है जरूरी?
ब्लैकआउट प्रोटोकॉल युद्ध के समय में बेहद प्रभावी और जरूरी होता है. इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन देश को रिहाइशी इलाकों की लोकेशन मिलने से रोकना है. आधुनिक युद्ध में ड्रोन और मिसाइलों की गति बहुत तेज होती है। Front News India हालांकि भारत के पास रूस का अमोघ अस्त्र S-400 है, जो पाकिस्तान की किसी भी मिसाइल को सीमा में घुसने से पहले ध्वस्त करने में सक्षम है, फिर भी ब्लैकआउट करके अपने नागरिकों को सुरक्षा का संदेश दिया जा सकता है.

ब्लैकआउट अब भी कारगर हो सकता है, क्योंकि स्मार्ट बम और विजुअल टारगेटिंग वाले ड्रोन को रोशनी से मदद मिलती है. ब्लैकआउट की स्थिति में पाकिस्तानी ड्रोन या मिसाइल अपना टारगेट मिस कर सकते हैं, जिससे कई लोगों की जान बचाई जा सकती है.
युद्ध के माहौल में इस तरह की कवायद करके देश के लोगों को हर परिस्थिति में रहने का अभ्यास कराया जाता है. जनता को डर और अफरा-तफरी से बचाने के लिए लोगों को मानसिक रूप से तैयार किया जाता है, ताकि वे पैनिक की स्थिति में घबराएं नहीं और जरूरी निर्देशों का पालन करें. आजकल युद्ध के समय सायरन के साथ-साथ SMS या मोबाइल ऐप के जरिए भी अलर्ट भेजे जाते हैं, जिनमें खतरे की जानकारी, सुरक्षित स्थान और आवश्यक समयावधि बताई जाती है. इसके अतिरिक्त, टीवी चैनलों, ऑल इंडिया रेडियो और एफएम के जरिए भी नागरिकों को युद्ध संबंधी जरूरी सूचनाएं प्रदान की जाती हैं।

® *__पाकिस्तान ने खटखटाया संयुक्त राष्ट्र का दरवाजा, UNSC आज करेगा आपात बैठक..!_*

1. भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर आज संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बैठक बुलाई गई है।

2. पाकिस्तान की गुजारिश पर UNSC ने सोमवार की दोपहर के लिए बैठक शेड्यूल की है।

* इस दौरान पहलगाम हमले को लेकर दोनों देशों के बीच चर्चा हो सकती है।

® *__भारत-पाक तनाव के बीच 7 मई को राज्यों में मॉक ड्रिल, हवाई हमले के सायरन समेत जानें और क्या होगा?_*

India Pakistan tension: पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के बीच भारत सरकार ने देश में रक्षा तैयारियां को लेकर अहम कदम उठाए हैं। सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यों को सुरक्षा उपायों को लेकर अहम निर्देश जारी किया है।

बता दें भारत सरकार ने अपनी नागरिक सुरक्षा तैयारियों को बढ़ा दिया है और गृह मंत्रालय ने राज्यों को 7 मई को मॉक ड्रिल करने का आदेश जारी किया है। इन अभ्यासों का उद्देश्य हवाई हमले की चेतावनी प्रणाली के परिचालन पहलुओं को दुरुस्त करना और नागरिकों और छात्रों के नागरिक सुरक्षा प्रशिक्षण को बढ़ाना है ताकि किसी हमले की स्थिति में वे खुद को बेहतर तरीके से बचाकर सुरक्षित कर सकें।

*गृह मंत्री ने सभी राज्यों को एयर रेड सायरन से संबंबित मॉक ड्रिल करवाने का निर्देश जारी किया है।*

7 मई को होने वाली मॉक ड्रिल को हवाई हमले की परिस्थितियों से जागरूक करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे नागरिक सुरक्षा प्रोटोकॉल का अभ्यास कर सकें।

राज्यों को अलर्ट करने के लिए हवाई हमले वाला सायरन लगाने का निर्देश दिया है। Front News India इन अभ्यासों में लोगों को तुरंत सुरक्षा के लिए सचेत करने में हवाई हमले के सायरन बजाना शामिल होगा।

इसके अलावा अभ्यास में शत्रुतापूर्ण हमले की स्थिति में नागरिकों और छात्रों को खुद को सुरक्षित करने का प्रशिक्षण देनें का आदेश दिया गया है। ताकि प्रतिकूल परिस्थितियों के दौरान खुद को प्रभावी ढंग से कैसे सुरक्षित रखा जाए ।

राज्यों के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और संयंत्रों का छिपाने का अभ्यास भी करवाया जाएगा

राज्यों को ब्लैकआउट रिहर्सल करवाने का भी आदेश दिया गया है।
फिरोजपुर में हुई ब्लैकआउट रिहर्सल
सतर्कता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सोमवार को फिरोजपुर कैंट क्षेत्र में 30 मिनट का ब्लैकआउट रिहर्सल की गई। कैंटोनमेंट बोर्ड/स्टेशन कमांडर के मार्गदर्शन में आयोजित इस अभ्यास में रात 9 बजे से 9:30 बजे तक लाइटें पूरी तरह से बंद कर दी गईं, यहां तक कि वाहनों की लाइटें भी पूरी तरह से बंद कर दी गईं ताकि नियमों का पूरी तरह से पालन हो सके।

® *_ममता ने भाजपा पर ‘सांप्रदायिक वायरस फैलाने’ का लगाया आरोप लगाया, केंद्र से सीमाओं की सुरक्षा करने का आग्रह_*

मुर्शिदाबाद: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को बीजेपी गठबंधन की केंद्र सरकार पर सांप्रदायिक नफरत फैलाने और देश की सीमा की सुरक्षा करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया. उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि वह कथित “घिनौनी और गंदी राजनीति” करने के बजाय देश की सीमाओं की रक्षा करे और पहलगाम आतंकी हमले से प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाए.
अप्रैल में सांप्रदायिक झड़पों के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहली बार दंगा प्रभावित मुर्शिदाबाद जिले का दौरा करने पहुंची थी. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की तीखी आलोचना करते हुए तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने आयोग के सदस्यों के मुर्शिदाबाद के हालिया दौरे के मद्देनजर उसकी प्राथमिकताओं पर सवाल उठाया. उन्होंने यह भी पूछा कि क्या एनएचआरसी के सदस्यों ने भाजपा शासित उत्तर प्रदेश और जातीय हिंसा प्रभावित मणिपुर का दौरा किया था.
ममता बनर्जी ने कहा, “क्या एनएचआरसी ने मणिपुर और उत्तर प्रदेश का दौरा किया? वे मुर्शिदाबाद का दौरा करने में तत्पर थे. जिस तरह 2016 में नोटबंदी की घोषणा के एक दिन बाद ऑनलाइन भुगतान मंच ने अखबारों में पहले पन्ने पर विज्ञापन दिए थे, front News India उसी तरह एनएचआरसी ने दंगे होने के तुरंत बाद मुर्शिदाबाद का दौरा किया. इसलिए मैं कह रही हूं कि यह पूर्व नियोजित था.”
ममता बनर्जी ने कहा कि अधिकतर साजिशों का पर्दाफाश कर दिया है. मीडिया के सामने इसका पर्दाफाश करूंगी. मीडिया पर हमला करते हुए ममता बनर्जी ने कहा दुर्भाग्य से, कुछ मीडिया संस्थान बेबुनियाद बातें फैलाने में भाजपा के हाथों की कठपुतली बन गए. पश्चिम बंगाल की सीएम ने दावा किया कि भाजपा ने मुर्शिदाबाद दंगों से प्रभावित परिवारों को ‘जबरन’ अन्य स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया ताकि वे उनसे मिल न सकें.
उन्होंने कहा, “भाजपा मुर्शिदाबाद दंगों से प्रभावित लोगों के परिवारों को वहां से दूर ले गयी ताकि वे मुझसे न मिल सकें. क्या यह अपहरण नहीं है? अगर मैं उनसे यहीं मिलती और उन्हें चेक सौंपती तो क्या नुकसान होता.” मुख्यमंत्री ने केंद्र को अपनी चेतावनी दोहराते हुए कहा, “सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के बजाय, हमारी सीमाओं की रक्षा के लिए प्रयास किए जाने चाहिए.” उन्होंने कहा, “जब आप कुर्सी पर होते हैं, तो आप लोगों को धार्मिक आधार पर नहीं बांट सकते।

® *_पाकिस्तानी साइबर अटैकर्स ने इंडियन डिफेंस वेबसाइट्स को निशाना बनाया, एक्सपर्ट्स कर रहे निगरानी_*

नई दिल्ली: पाकिस्तान स्थित हैकर्स के इंडियन डिफेंस वेबसाइटेस पर हमला किए जाने के बाद, सूत्रों ने कहा कि सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने, डिजिटल डिफेंस को मजबूत करने और घुसपैठ के प्रयासों से बचाव के लिए उचित उपाय किए जा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स किसी भी अतिरिक्त साइबर अटैक का पता लगाने के लिए साइबरस्पेस की निगरानी कर रहे हैं. विशेष रूप से वे जो पाकिस्तान से जुड़े खतरे वाले एक्टर्स द्वारा स्पांसर हो सकते हैं.
न्यूज एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से कहा कि ट्विटर अकाउंट ‘पाकिस्तान साइबर फोर्स’ के माध्यम से यह पता चला है कि ग्रुप ने कथित तौर पर भारतीय सैन्य इंजीनियरिंग सर्विस और इंस्टिट्यूट ऑफ मनोहर पर्रिकर डिफेंस स्टडी और एनालिसिस से संवेदनशील डेटा तक एक्सेस हासिल किया है. सूत्रों ने कहा कि यह दावा बताता है कि अटैकर्स के लॉगिन क्रेडेंशियल सहित रक्षा कर्मियों से संबंधित पर्सनल जानकारी से समझौता हो सकता है.

आर्मर्ड व्हीकल निगम लिमिटेड की वेबसाइट खराब करने की कोशिश

सूत्रों ने बताया कि इस डेटा चोरी के अलावा, यह भी बताया गया है कि समूह ने रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाली सार्वजनिक उपक्रम कंपनी आर्मर्ड व्हीकल निगम लिमिटेड की आधिकारिक वेबसाइट को भी खराब करने की कोशिश की है। Front News India वेबसाइट को पाकिस्तानी झंडे और अल खालिद टैंक का इस्तेमाल करके खराब किया गया है।

सूत्रों ने बताया कि एहतियाती उपाय के तौर पर आर्मर्ड व्हीकल निगम लिमिटेड की वेबसाइट को पूरी तरह से ऑडिट के लिए ऑफलाइन कर दिया गया है, ताकि वेबसाइट को नुकसान पहुंचाने की कोशिश से होने वाले किसी भी संभावित नुकसान का आकलन किया जा सके और वेबसाइट की अखंडता सुनिश्चित की जा सके.

साइबरस्पेस की सक्रिय रूप से निगरानी

एक सूत्र ने बताया, “साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और एजेंसियां किसी भी अतिरिक्त साइबर हमले का पता लगाने के लिए साइबरस्पेस की सक्रिय रूप से निगरानी कर रही हैं, खासकर उन हमलों का जो पाकिस्तान से जुड़े खतरे पैदा करने वाले तत्वों द्वारा प्रायोजित हो सकते हैं.”
सूत्र ने कहा, “सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने, डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने और आगे की घुसपैठ की कोशिशों से बचाव के लिए उचित और आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं.” सूत्रों ने कहा कि ये प्रयास ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के लचीलापन बढ़ाने और यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित हैं कि भविष्य के साइबर खतरों से बचाव के लिए सेना बेहतर तरीके से तैयार हो.
बता दें कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है, जिसमें 26 लोग मारे गए थे. इनमें से ज्यादातर पर्यटक थे. सरकार ने कहा है कि हमले के अपराधियों को कड़ी सजा मिलेगी।

® *_पंजाब एक बूंद पानी हरियाणा को नहीं देगा: मान सरकार ने विधानसभा में प्रस्ताव पेश_*

चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा के बीच जल बंटवारे को लेकर जारी गतिरोध के बीच भगवंत मान सरकार ने सोमवार को राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें पड़ोसी राज्य के लिए अपने हिस्से का एक भी बूंद पानी नहीं छोड़ने का संकल्प लिया गया.पंजाब के जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान प्रस्ताव पेश किया और इसे सदन में चर्चा के लिए रखा गया. गोयल ने प्रस्ताव पढ़ते हुए कहा कि भाजपा हरियाणा और केंद्र में अपनी सरकारों और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के माध्यम से पंजाब के अधिकारों को छीनने की कोशिश कर रही है.

‘पंजाब का पानी हरियाणा को देना चाहती है BJP’

प्रस्ताव के अनुसार असंवैधानिक और गैरकानूनी तरीके से बीबीएमबी की बैठक बुलाकर पंजाब के हक का पानी जबरदस्ती हरियाणा को दिलाने का प्रयास किया जा रहा है. हरियाणा ने 31 मार्च तक अपने हिस्से का पूरा पानी इस्तेमाल कर लिया है. अब भाजपा पंजाब का पानी हरियाणा को देना चाहती है. प्रस्ताव में कहा गया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान मान सरकार ने पंजाब के हर खेत तक नहर से पानी पहुंचाने का प्रयास किया है.
‘एक-एक बूंद पंजाब के लिए कीमती’
इसमें कहा गया है, “बहुत बड़े पैमाने पर नहरों और जलमार्गों का जाल बिछाया गया है. 2021 तक पंजाब के सिर्फ 22 प्रतिशत खेतों को नहर का पानी मिलता था, लेकिन आज पंजाब के करीब 60 प्रतिशत खेतों को नहर का पानी मिल रहा है. पंजाब के पानी की एक-एक बूंद पंजाब के लिए बहुत कीमती हो गई है। Front News India पंजाब के पास अब किसी दूसरे राज्य को देने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है.”
प्रस्ताव के अनुसार हरियाणा ने छह अप्रैल को पंजाब से पीने के लिए पानी छोड़ने का अनुरोध किया था, जिसके बाद पंजाब ने बड़ा दिल दिखाते हुए 4,000 क्यूसेक पानी दिया. इसमें कहा गया है, “हमारे गुरुओं ने हमें सिखाया है कि किसी भी प्यासे व्यक्ति को पानी पिलाना बहुत बड़ा पुण्य है.”गोयल ने प्रस्ताव का हवाला देते हुए कहा कि हरियाणा की आबादी तीन करोड़ है और उसे पीने तथा अन्य मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए केवल 1,700 क्यूसेक पानी की आवश्यकता है.
‘अवैध तरीके से बीबीएमबी की बैठक बुलाई’
उन्होंने कहा, “अब हरियाणा कह रहा है कि उसे अचानक 8,500 क्यूसेक पानी की जरूरत है. पंजाब के पास अपनी मांग पूरी करने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है. इसलिए भारतीय जनता पार्टी ने जबरन असंवैधानिक और अवैध तरीके से बीबीएमबी की बैठक बुलाई और प्रस्ताव पारित किया कि पंजाब को अपने हिस्से का पानी हरियाणा को देना होगा.”
प्रस्ताव में कहा गया, “यह हमें स्वीकार्य नहीं है.”इसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया कि पंजाब सरकार अपने हिस्से का एक बूंद पानी भी हरियाणा को नहीं देगी. चर्चा में भाग लेते हुए विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने प्रस्ताव का पूर्ण समर्थन किया तथा कहा कि देने के लिये पंजाब के पास एक बूंद भी पानी अतिरिक्त नहीं है।

® *_सिंधु जल संधि निलंबित करने के बाद भारत की कार्रवाई, 6 परियोजनाओं पर तेजी से होगा कार्य_*

नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 24 अप्रैल 2025 को पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था. इस फैसले के एक सप्ताह बाद, भारत ने कश्मीर में दो पनबिजली परियोजनाओं में जलाशय भंडारण क्षमता बढ़ाना शुरू कर दिया है. सूत्रों के मुताबिक, पिछले सप्ताह राष्ट्रीय जलविद्युत निगम द्वारा सलाल बांध और बगलिहार बांध परियोजनाओं में जलाशय फ्लशिंग यानी तलछट को हटाने का कार्य किया गया.
भारत सरकार की तरफ से क्षेत्र में रुकी हुई छह परियोजनाओं के निर्माण में भी तेजी लाने की उम्मीद है, जिसमें सावलकोट में 1,856 मेगावाट की जल विद्युत परियोजना, किरथाई I और II सुविधाएं जो संयुक्त रूप से 1,320 मेगावाट बिजली पैदा करेंगी, तथा पाकल दुल में 1,000 मेगावाट की सुविधा, तथा तीन अन्य परियोजनाएं जो कुल मिलाकर 2,224 मेगावाट बिजली पैदा करेंगी.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इन छह परियोजनाओं के पूरा होने पर जम्मू-कश्मीर में 10,000 मेगावाट तक बिजली पैदा हो सकेगी और मैदानी इलाकों में सिंचाई और घरेलू खपत के लिए अधिक पानी उपलब्ध हो सकेगा.
अगर सिंधु जल संधि अभी भी लागू होती, तो भारत को निर्माण शुरू करने से पहले पाकिस्तान को छह महीने का नोटिस देना पड़ता. ऐसे में इस्लामाबाद परियोजनाओं में देरी या उन्हें रद्द करने के लिए कई कानूनी चुनौतियां पेश करता.जलाशयों की सफाई इसी कारण से महत्वपूर्ण थी; भारत 1987 और 2009 में इनके निर्माण के बाद से इन्हें साफ नहीं कर पाया था, क्योंकि सिंधु जल संधि द्वारा इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। Front News India फ्लशिंग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था क्योंकि निचले इलाकों के देशों (पाकिस्तान) को छोड़े गए पानी के बल से बाढ़ और संपत्ति के विनाश का सामना करना पड़ सकता था. इससे पानी की बर्बादी भी होती है.
अधिक कुशल बिजली उत्पादन में मदद
हालांकि, सूत्रों ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि फ्लशिंग प्रैक्टिस को अंजाम देने में सक्षम होने से अधिक कुशल बिजली उत्पादन में मदद मिलेगी और टर्बाइनों को नुकसान से बचाया जा सकेगा. यह बताया गया कि 690 मेगावाट सलाल और 900 मेगावाट बगलिहार संयंत्र अपनी क्षमता से काफी कम पर काम कर रहे थे.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, छह परियोजनाओं पर निर्माण शुरू करने के संबंध में इसी हफ्ते केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जल संसाधन मंत्री सीआर पाटिल, ऊर्जा मंत्री एमएल खट्टर, कृषि मंत्री शिवराज चौहान और प्रत्येक मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच एक बड़ी बैठक होने की संभावना है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि शाह, पाटिल और उनके मंत्रालय के अधिकारियों के बीच दो बैठकें पहले ही हो चुकी हैं, जिनमें चेनाब (भारत को सिंधु जल संधि के तहत आवंटित) और झेलम (पाकिस्तान को) नदियों पर नई परियोजनाएं शुरू करने और वुलर झील को पुनर्जीवित करने समेत अन्य संभावित गतिविधियों पर चर्चा की गई.
सिंधु जल संधि पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता है; यह सिंधु नदी और इसकी पांच प्रमुख सहायक नदियों का भारत और पाकिस्तान के बीच बंटवारा करता है. इससे पाकिस्तान को लगभग 80 प्रतिशत पानी मिलता है. संधि को निलंबित करने के बाद से इस बात पर चर्चा हो रही है कि भारत किस प्रकार पाकिस्तान को जल का प्रवाह प्रभावी रूप से रोक सकता है, ताकि सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लि

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