छत्तीसगढ़। गरियाबंद पुलिस ने नक्सल मोर्चे पर एक बड़ी कामयाबी हासिल की है।गरियाबंद-धमतरी-नुआपाड़ा डिवीजन में सक्रिय तीन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है।इनमें एक पुरुष और दो महिला नक्सली शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि इन सभी पर 1-1 लाख रुपए का इनाम घोषित था।
आत्मसमर्पण करने वालों में नागेश ने एक देशी हथियार के साथ सरेंडर किया। इसके साथ ही दो महिला नक्सली जैनी और मनीला भी शामिल रही। ये तीनों पिछले 5 से 8 वर्षों से इलाके में सक्रिय थे और कई बड़ी माओवादी घटनाओं में शामिल पाए गए थे। इनके बारे में कहा जा रहा है कि वे बड़े नक्सली नेताओं के करीबी सहयोगी रहे हैं।इन नक्सलियों ने सरकार की समर्पण और पुनर्वास योजना का लाभ उठाते हुए आत्मसमर्पण किया। प्रशासन ने इसे नक्सल उन्मूलन अभियान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। गरियाबंद क्षेत्र में अब तक इस अभियान के तहत कुल 30 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।
• *_1 थप्पड़ का बदला लिया डबल मर्डर से, टाटा सफारी से कुचलकर मार डाले दो लोग_*
छतीसगढ। महासमुंद नेशनल हाईवे-353 पर 4 अक्टूबर की रात एक सनसनीखेज घटना हुई, जिसमें टाटा सफारी से दो लोगों को कुचलकर मौत के घाट उतार दिया गया। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार रात लगभग 8 बजे, हल्की चहल-पहल वाले हाईवे पर अचानक तेज रफ्तार टाटा सफारी दिखाई दी, जिसने स्कूटी पर सवार दो दोस्तों को टक्कर मारी और बार-बार गाड़ी से कुचला। मौके पर जितेंद्र चंद्राकर (46) की मौत हो गई और अशोक साहू (50) रास्ते में दम तोड़ बैठे।
जितेंद्र, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष हुलसी चंद्राकर के पति थे। पुलिस जांच में सामने आया कि सफारी चलाने वाला आरोपी अमन अग्रवाल था, जो 5 साल पहले हुए थप्पड़ का बदला लेने के लिए यह वारदात कर रहा था।
अमन अग्रवाल ने पुलिस को बताया कि पिछले पांच साल से दिल में बदले की आग जल रही थी। उसने रात को दोनों का पीछा किया और साराडीह मोड़ के पास योजना के तहत हमला किया। गाड़ी से पहले जितेंद्र और फिर अशोक को कुचला। अमन का कहना था कि अशोक की मौत गलती से हुई; उसका लक्ष्य सिर्फ जितेंद्र था।
स्थानीय लोगों की त्वरित सूचना पर पुलिस और एम्बुलेंस घटनास्थल पर पहुंची। अशोक को गंभीर हालत में रायपुर रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में उसकी भी मौत हो गई। ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार के बाद हत्या के आरोप में नेशनल हाईवे जाम कर दिया।पुलिस ने फोरेंसिक जांच के आधार पर यह घटना सड़क हादसा नहीं बल्कि हत्या की साजिश निकाली। गाड़ी के पहियों और शरीर पर लगे निशान स्पष्ट कर रहे थे कि दोनों को बार-बार कुचला गया।
पुलिस ने आरोपी अमन अग्रवाल के अलावा उसके साथियों वीरेंद्र विश्वकर्मा और अजीत बघेल को भी गिरफ्तार किया। प्रारंभ में मामूली धाराओं में मामला दर्ज हुआ था, लेकिन जांच के बाद 103(1) हत्या और 61(2) षड्यंत्र जैसी गंभीर धाराएं जोड़ी गईं।पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पूरी योजना और विवाद की जानकारी साझा की। मामला 5 साल पुराने जमीन विवाद और पुराने थप्पड़ से जुड़ा था, जिसके चलते अमन ने यह निर्मम कदम उठाया।
• *_ट्रंप की नई नीति: अमेरिकी यूनिवर्सिटीज़ में सिर्फ 5% भारतीय छात्रों को मिलेगा दाखिला, इंटरनेशनल स्टूडेंट्स पर 15% की सीमा_*
नईदिल्ली। अमेरिकी सरकार की नई गाइडलाइंस के तहत नौ प्रमुख यूनिवर्सिटीज़ में इंटरनेशनल छात्रों की संख्या 15% तक सीमित कर दी गई है, जिसमें किसी एक देश से सिर्फ 5% छात्र ही हो सकते हैं। इस फैसले से भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका में उच्च शिक्षा पाना और मुश्किल हो सकता है
ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका की नौ प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज़ को एक सख्त मेमो जारी किया है, जिसमें फेडरल फंडिंग जारी रखने के लिए कुछ नई शर्तों का पालन करने को कहा गया है। सबसे अहम बदलावों में से एक है इंटरनेशनल स्टूडेंट्स की संख्या पर कड़ा प्रतिबंध – कुल अंडरग्रेजुएट नामांकन का केवल 15% विदेशी छात्र हो सकते हैं, और इनमें से किसी एक देश से अधिकतम 5% ही हो सकते हैं।
यह नियम भारतीय छात्रों के लिए खासतौर पर चिंता का कारण है, क्योंकि अमेरिका में इंटरनेशनल छात्रों में भारत और चीन का सबसे बड़ा हिस्सा है — लगभग 35%। नए नियमों के चलते, इन देशों के छात्रों को सीमित सीटों में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।
मेमो में दिए गए प्रमुख निर्देश:
विदेशी छात्रों की संख्या सीमित: कुल अंडरग्रेजुएट छात्रों में केवल 15% इंटरनेशनल स्टूडेंट्स और किसी एक देश से अधिकतम 5%।
एडमिशन और स्कॉलरशिप नियम: एडमिशन और फाइनेंशियल एड में जाति, लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा।
पब्लिक डेटा: छात्रों की भर्ती संबंधी डेटा (जाति, लिंग, देश के अनुसार) सार्वजनिक करना होगा।
स्टैंडर्ड टेस्ट अनिवार्य: सभी उम्मीदवारों के लिए SAT जैसे स्टैंडर्डाइज्ड टेस्ट अनिवार्य होंगे।
फीस और खर्च पर नियंत्रण: अगले 5 वर्षों तक ट्यूशन फीस फ्रीज़ रहेगी, प्रशासनिक खर्च कम करने पर ज़ोर।
एंडोमेंट शर्तें: बड़े फंड वाली यूनिवर्सिटीज़ को साइंस कोर्सेज़ में पढ़ने वाले छात्रों की फीस माफ करनी होगी।
राजनीतिक संतुलन: यूनिवर्सिटीज़ से उम्मीद की गई है कि वे रूढ़िवादी विचारधारा को दबाने वाली नीतियों से दूर रहें।
विदेशी छात्रों की वैल्यू स्क्रीनिंग: इंटरनेशनल छात्रों की “अमेरिकी और पश्चिमी मूल्यों” के प्रति सोच की जांच की जाएगी।
किन यूनिवर्सिटीज़ को भेजा गया है मेमो?
इन नौ टॉप यूनिवर्सिटीज़ को यह मेमो भेजा गया है:
यूनिवर्सिटी ऑफ एरिज़ोना
ब्राउन यूनिवर्सिटी
डार्टमाउथ कॉलेज
एमआईटी (MIT)
यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिलवेनिया
यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया
यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सस
यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया
वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी
इन संस्थानों में भारतीय छात्रों की बड़ी संख्या पढ़ती है, और यह निर्णय उनके लिए नए प्रवेश में मुश्किलें पैदा कर सकता है।
अब आगे क्या?
फिलहाल, ये नए नियम भारतीय छात्रों के लिए इन प्रमुख यूनिवर्सिटीज़ में दाखिला पाना और कठिन बना सकते हैं। 5% की देशवार सीमा के कारण, प्रतिस्पर्धा और अधिक बढ़ेगी। छात्रों को अब वैकल्पिक यूनिवर्सिटीज़ तलाशनी पड़ सकती हैं या अधिक खर्चीले विकल्पों पर विचार करना होगा।
• *_सुप्रीम कोर्ट में CJI बीआर गवई पर हमला करने की कोशिश: वकील ने फेंका जूता, लगाया नारा_*
नईदिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक वकील ने सीजेआई बीआर गवई पर हमला करने की कोशिश की।कोर्ट रूम में जूता फेंकने और ‘सनातन का अपमान नहीं सहेंगे’ का नारा लगाने की यह घटना उस समय हुई जब सीजेआई गवई किसी मामले की सुनवाई कर रहे थे।सुरक्षाकर्मियों ने फौरन आरोपी वकील राकेश किशोर कुमार को पकड़ लिया। घटना के बाद CJI ने कोर्ट में मौजूद वकीलों से कहा कि वे अपनी दलीलें जारी रखें और इस घटना से परेशान न हों। CJI ने स्पष्ट किया कि उन्हें इन घटनाओं से कोई फर्क नहीं पड़ता।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राकेश किशोर 2011 से सुप्रीम कोर्ट बार में रजिस्टर्ड हैं। माना जा रहा है कि वह मध्य प्रदेश के खजुराहो के जवारी (वामन) मंदिर में भगवान विष्णु की 7 फीट ऊंची खंडित मूर्ति की बहाली को लेकर कोर्ट की टिप्पणी से नाराज थे।
16 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें मूर्ति की पुनर्स्थापना की मांग की गई थी। CJI ने कहा था कि प्रतिमा जिस स्थिति में है, वही रहेगी और श्रद्धालु पूजा के लिए अन्य मंदिर जा सकते हैं।
इस विवाद पर CJI ने पहले भी सफाई दी थी कि उनकी टिप्पणी सोशल मीडिया पर गलत तरीके से दिखायी गई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने भी सोशल मीडिया पर बढ़ा-चढ़ाकर फैलाए जा रहे बयान की आलोचना की।
• *_पश्चिम बंगाल: जलपाईगुड़ी में भीड़ ने BJP सांसद खगेन मुर्मू पर किया हमला, घायल_*
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को जायजा लेने पहुंचे भाजपा सांसद खगेन मुर्मू पर सोमवार को स्थानीय लोगों ने हमला कर दिया, जिसमें वह घायल हो गए. भाजपा विधायक डॉ. शंकर घोष ने आरोप लगाया कि राहत सामग्री वितरित करते समय नागराकाटा में उन पर और मालदा उत्तर के सांसद खगेन मुर्मू पर भीड़ ने हमला किया.
आरोप है कि सांसद मुर्मू और विधायक शंकर घोष को स्थानीय लोगों ने कथित तौर पर धक्का दिया, जब वे उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के बाढ़ प्रभावित नागराकाटा इलाके में स्थिति का जायजा लेने गए थे. घोष ने अस्पताल ले जाए जाने से पहले खून से सने सांसद मुर्मू का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया और दावा किया कि नागराकाटा इलाके में स्थानीय लोगों ने उन्हें धक्का दिया और उनके वाहन में तोड़फोड़ की.सिलीगुड़ी से भाजपा विधायक घोष ने कहा कि घटना के तुरंत बाद उन्हें मालदा उत्तर के सांसद को अस्पताल ले जाने के लिए वहां से निकलना पड़ा।
*`खबरें→ फ्रंट न्यूज इंडिया पेज से`*
भाजपा नेताओं पर हमले की निंदा करते हुए केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि इस घटना से पता चलता है कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र नाम की कोई चीज नहीं है. उन्होंने कहा, “आज हमारे प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में भाजपा की एक टीम राहत कार्य के लिए, लोगों से मिलने वहां गई थी… ममता बनर्जी ने बांग्लादेश से रोहिंग्याओं को लाकर और उन्हें यहां बसाकर ऐसी स्थिति पैदा की है. मुझे लगता है कि यह पहले से योजनाबद्ध था और इसमें मुख्यमंत्री भी शामिल हैं, क्योंकि इतना बड़ा हमला मुख्यमंत्री की जानकारी के बिना नहीं हो सकता.”
पश्चिम बंगाल भाजपा के सह-प्रभारी अमित मालवीय ने कथित हमले को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आलोचना की और इसे “टीएमसी का जंगल राज” बताया. मालवीय ने एक्स पर कथित हमले का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “बंगाल में टीएमसी का जंगल राज! भाजपा सांसद खगेन मुर्मू, जो एक सम्मानित आदिवासी नेता और उत्तर मालदा से दो बार सांसद रहे हैं, पर टीएमसी के गुंडों ने उस समय हमला किया जब वे विनाशकारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन के बाद राहत और बचाव कार्यों में मदद करने के लिए जलपाईगुड़ी के दुआर्स क्षेत्र के नागराकाटा जा रहे थे.”
भाजपा नेता ने दावा किया कि पार्टी कार्यकर्ताओं पर राहत कार्य करने के लिए हमला किया जा रहा है जबकि मुख्यमंत्री बनर्जी और सत्तारूढ़ टीएमसी “कार्रवाई से गायब” हैं. उन्होंने पोस्ट में लिखा, “जब ममता बनर्जी अपने कोलकाता कार्निवल में नाच रही हैं, टीएमसी और राज्य प्रशासन कार्रवाई से गायब है. जो लोग वास्तव में लोगों की मदद कर रहे हैं, भाजपा नेता और कार्यकर्ता, उन पर राहत कार्य करने के लिए हमला किया जा रहा है. यह टीएमसी का बंगाल है, जहां क्रूरता का बोलबाला है और करुणा को सजा दी जाती है.”
पिछले दो दिनों में उत्तर बंगाल के कई जिलों में मूसलाधार बारिश के बाद बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है. भाजपा के दोनों नेता स्थिति का जायजा लेने बाढ़ प्रभावित इलाके में गए थे.
वहीं, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बताया कि उत्तर बंगाल में बाढ़ से अब तक 23 लोगों की मौत हो चुकी है.
दार्जिलिंग में हुए विनाशकारी भूस्खलन में 18 लोगों की जान चली गई है. जबकि भूस्खलन से विस्थापित हुए 40 से ज्यादा ग्रामीणों ने मिरिक के एक सामुदायिक भवन में आयोजित एक राहत शिविर में शरण ली है.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक आपातकालीन वर्चुअल बैठक की और घोषणा की कि वह आज आपदा प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगी. मुख्यमंत्री ने एक अन्य पोस्ट में कहा, “संकोश नदी में एक साथ अत्यधिक जल प्रवाह था और भूटान तथा सिक्किम से नदी का जल सामान्य रूप से प्रवाहित हो रहा था. इससे आपदाएं उत्पन्न हुईं. हमें यह जानकर गहरा सदमा हुआ है कि भारी बारिश और नदी में आई बाढ़ के कारण उत्पन्न स्थिति में हमने अपने कुछ भाई-बहनों को खो दिया है. मैं मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं.”
• *_जम्मू-कश्मीर : नगरोटा-बडगाम विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तारीख घोषित, 11 नवंबर को वोटिंग_*
श्रीनगर: भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने सोमवार घोषणा कर दी कि जम्मू और कश्मीर की नगरोटा और बडगाम दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 11 नवंबर को होंगे. मतगणना और परिणाम 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे.
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा करते हुए यह भी घोषणा की कि नगरोटा और बडगाम विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव 11 नवंबर को होंगे. जम्मू क्षेत्र के उधमपुर जिले में नगरोटा विधानसभा क्षेत्र और बडगाम विधानसभा सीट पिछले साल अक्टूबर और नवंबर में रिक्त हो गई थी.
बडगाम सीट उमर अब्दुल्ला द्वारा गांदरबल सीट पर कब्जा बरकरार रखने के बाद खाली हुई थी. वहीं नगरोटा सीट भाजपा नेता देवेंद्र सिंह राणा के निधन के बाद खाली हुई थी.
बडगाम सीट पिछले साल 21 अक्टूबर को खाली हो गई थी, जब नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला ने गांदरबल सीट बरकरार रखने के लिए इसे खाली कर दिया था – जो उनका पारिवारिक गढ़ है. उमर अब्दुल्ला ने पीडीपी के उम्मीदवार बशीर मीर के खिलाफ 10,574 वोटों से जीत हासिल की थी.
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के युवा उम्मीदवार आगा सैयद मुंतजिर मेहदी को 18,485 मतों से हराकर बडगाम सीट पर जीत हासिल की थी.
नगरोटा सीट भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक देवेंद्र सिंह राणा के निधन के कारण रिक्त हुई थी. विधायक के रूप में शपथ लेने से पहले, 59 वर्षीय राणा का बीमारी के बाद 1 नवंबर, 2024 को निधन हो गया था.
उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और नेशनल कॉन्फ्रेंस के उम्मीदवार जोगिंदर सिंह को 30,472 मतों से हराकर यह सीट जीती थी. राणा की बेटी देवयानी राणा इस निर्वाचन क्षेत्र में कई कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं और भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
हालांकि इन दोनों सीटों पर उपचुनाव कराने के लिए छह महीने का समय इस वर्ष अप्रैल में समाप्त हो गया. भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने निर्धारित समय पर चुनाव नहीं कराए, जिसकी जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों ने आलोचना की.
केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में 90 विधायकों को चुनने के लिए विधानसभा चुनाव दस साल के अंतराल के बाद 2024 में 18 सितंबर से 1 अक्टूबर तक तीन चरणों में आयोजित किया गया था.
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (आरपीए) की धारा 151ए के अनुसार, किसी रिक्ति को भरने के लिए उपचुनाव, रिक्ति होने की तिथि से छह महीने के भीतर आयोजित किया जाना चाहिए.
चुनावों में देरी के लिए, धारा में दो अपवाद सूचीबद्ध हैं: यदि कार्यकाल का शेष भाग एक वर्ष से कम है या यदि भारत सरकार के परामर्श से भारत का निर्वाचन आयोग यह प्रमाणित करता है कि छह महीने के भीतर चुनाव कराना कठिन है.
बता दें कि भारत निर्वाचन आयोग ने पिछले सप्ताह बिहार तथा जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, झारखंड, तेलंगाना, पंजाब, मिजोरम और ओडिशा में होने वाले उपचुनावों में केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में 470 अधिकारियों को तैनात करने का निर्णय लिया है.
• *_’मंत्री बनना है तो अर्जी दाखिल कर अनुमति लें’: सुप्रीम कोर्ट ने डीएमके नेता को दिये निर्देश_*
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि अगर तमिलनाडु के पूर्व मंत्री और डीएमके के कद्दावर नेता सेंथिल बालाजी मंत्री बनना चाहते हैं, तो उन्हें अदालत से अनुमति के लिए आवेदन करना चाहिए, जिस पर विचार किया जाएगा. बालाजी को ‘नौकरी के बदले नकदी’ घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत दी गई थी.
इस साल 23 अप्रैल को, सर्वोच्च न्यायालय ने बालाजी को यह स्पष्ट कर दिया था कि उन्हें जमानत योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि अनुच्छेद 21 के संभावित उल्लंघन के आधार पर दी गई थी. उन्हें चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया तो जमानत रद्द हो सकती है, यह कहते हुए कि ‘हम एक विकल्प दे रहे हैं: स्वतंत्रता या पद?’ 27 अप्रैल को, बालाजी ने एम के स्टालिन के नेतृत्व वाले राज्य मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया.
बालाजी ने अपने नवीनतम आवेदन में स्पष्टीकरण मांगा है कि न्यायमूर्ति अभय एस ओका (जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं) की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा अप्रैल में पारित आदेश के पैराग्राफ में यह आदेश नहीं दिया गया है कि धन शोधन के मुकदमे के लंबित रहने के दौरान वह मंत्री नहीं बन सकते.
6 अक्टूबर को यह मामला न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष आया. वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ के समक्ष सेंथिल बालाजी का प्रतिनिधित्व किया. महाधिवक्ता तुषार मेहता ने प्रवर्तन निदेशालय का प्रतिनिधित्व किया. पीठ ने कहा कि पिछले आदेश ने बालाजी को मंत्री बनने से नहीं रोका था, क्योंकि इसमें केवल एक प्रस्तुतिकरण दर्ज किया गया था.
आज सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि अदालत ने बालाजी को मंत्री बनने से नहीं रोका है और निश्चित रूप से हम उन्हें मंत्री बनने से रोकने की स्थिति में नहीं हैं. “लेकिन जिस दिन आप मंत्री बनेंगे और हमें पता चलेगा कि आप पहले भी गवाहों को प्रभावित करने में लिप्त रहे हैं…हां, हम जमानत वापस ले लेंगे.”
सिब्बल ने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर यह पाया जाता है कि उनका मुवक्किल ऐसी गतिविधियों में लिप्त है, तो न्यायाधीश उस आदेश को वापस ले सकते हैं और उनकी जमानत रद्द कर सकते हैं.
पीठ ने कहा कि वह न्यायमूर्ति ओका की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा पहले पारित आदेश में संशोधन नहीं कर सकती. सिब्बल ने कहा कि वह आदेश में संशोधन की मांग नहीं कर रहे हैं और ऐसा कोई निषेधाज्ञा नहीं हो सकती कि अभियोजन के दौरान वह किसी पद पर नहीं रह सकते.
न्यायमूर्ति बागची ने कहा, “सिब्बल, हम इस आदेश को आपके मंत्री बनने पर रोक के रूप में नहीं देखते. हालांकि, हमारे अनुमान में आप मंत्री बन रहे हैं और इन टिप्पणियों और अन्य पूर्व आदेशों के आलोक में, आपकी जमानत जारी रखने के संबंध में यह एक प्रासंगिक विचार होगा…”
सिब्बल ने कहा कि इसे मेरे खिलाफ किसी प्रभावशाली पद पर होने के कारण निषेधाज्ञा के रूप में नहीं देखा जा सकता और जमानत आदेश में उनके मंत्री होने के बारे में एक शब्द भी नहीं लिखा था. पीठ ने कहा कि आपके द्वारा मंत्री पद की ज़िम्मेदारियां स्वीकार करने से राज्य का माहौल प्रभावित होता है, और आगे कहा, “हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि न्याय की एक स्पष्ट धारा प्रवाहित हो.”
सिब्बल ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है और उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ गवाहों को प्रभावित करने का एक भी आरोप नहीं है. न्यायमूर्ति कांत ने एक पुराने आदेश का हवाला देते हुए कहा कि सिब्बल के मुवक्किल के खिलाफ एक निष्कर्ष है. सिब्बल ने कहा कि मुकदमा अभी शुरू होना बाकी है और किसी को प्रभावित करने का कोई मामला नहीं है और ऐसा कोई आरोप नहीं है कि उनके मुवक्किल ने किसी से संपर्क किया है, और उन्होंने पूरा सहयोग किया है.
सिब्बल ने कहा कि इस आदेश को यह नहीं समझा जाना चाहिए कि किसी भी तरह के अभियोजन का सामना कर रहे व्यक्ति को सत्ता में बने रहने का अधिकार नहीं है, और पिछली पीठ, जिसने इस मामले में आदेश पारित किया था, ने यह नहीं कहा था कि वह सत्ताधारी पद पर नहीं रह सकता, और इसीलिए वह स्पष्टीकरण मांग रहे हैं और कानूनन ऐसा आदेश अदालत द्वारा जारी नहीं किया जा सकता.
पीठ ने कहा, “जमानत मिलने के बाद, अदालत ने आपके मंत्री बनने पर कड़ी आपत्ति जताई… जब तक आप निर्दोष साबित नहीं हो जाते, आपको सार्वजनिक पद पर नहीं रहना चाहिए… किसी भी समय, मान लीजिए कि आप मंत्री बनना चाहते हैं, तो आप शायद अदालत से अनुमति लेने के लिए आवेदन दायर करें, हम उस पर विचार करेंगे.”
सिब्बल ने कहा कि न्यायाधीश इसे एक आदेश के रूप में पढ़ रहे हैं. पीठ ने कहा कि बेहतर होगा कि सिब्बल इस आवेदन पर ज़ोर न दें. मेहता ने कहा कि सिब्बल द्वारा आवेदन वापस लेने से पहले, क्या अदालत इस मामले में पारित कुछ न्यायिक आदेशों पर गौर करेगी? उन्होंने आगे कहा, “मेरा विशेष मामला यह है कि यह क़ानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है.” मेहता ने कहा कि बालाजी के आवेदन को जुर्माने के साथ खारिज कर दिया जाना चाहिए.
पीठ ने बालाजी द्वारा उस आदेश के संबंध में स्पष्टीकरण के लिए दायर आवेदन पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसके तहत उन्हें इस वर्ष अप्रैल में मंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया था.
तमिलनाडु से बाहर मुकदमे का स्थानांतरणः
शीर्ष न्यायालय ने बालाजी के खिलाफ मुकदमे को तमिलनाडु से बाहर स्थानांतरित करने की मांग वाली एक याचिका पर भी जवाब मांगा. पीठ ने सुझाव दिया कि मुकदमे को दिल्ली स्थानांतरित किया जा सकता है. अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले एक वकील ने कहा कि यह संभव नहीं हो सकता क्योंकि सभी गवाह तमिलनाडु में रहते हैं. हालांकि, पीठ ने कहा कि अगर मुकदमे को तमिलनाडु से बाहर स्थानांतरित किया जाता है तो गवाह ऑनलाइन गवाही दे सकते हैं.
मेहता ने कहा कि स्थानीय पुलिस इस मामले में कुछ नहीं कर रही है. इस समय, तमिलनाडु सरकार के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता अमित आनंद तिवारी ने मेहता की दलीलों का कड़ा विरोध करते हुए कहा, “यह अनुचित है…” और कहा कि मुकदमे को समाप्त करना संभव नहीं होगा क्योंकि सभी गवाह राज्य में रहते हैं. सिब्बल ने कहा कि आरोपी पक्षकार नहीं हैं. राज्य के वकील ने कहा कि अगर मुकदमे को स्थानांतरित किया जाता है तो ऐसा लगेगा कि व्यवस्था में कोई भरोसा नहीं है।
*`खबरें→ फ्रंट न्यूज इंडिया पेज से`*
पीठ ने कहा कि अगर मुकदमे को किसी तटस्थ स्थान पर स्थानांतरित कर दिया जाता है, तो गवाह ऑनलाइन गवाही दे सकते हैं और एक समर्पित अदालत मामले की दैनिक सुनवाई कर सकती है.
पीठ ने कहा, “हम आज कोई आदेश पारित नहीं कर रहे हैं. हम सुझाव दे रहे हैं कि राज्य के खिलाफ ऐसे आरोप न लगें…” और आगे कहा कि वह आज केवल एक सुझाव दे रही है. तमिलनाडु सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता ए.एम. सिंघवी ने कहा कि निश्चित रूप से राज्य चिंतित है क्योंकि वे कहेंगे कि यह एक पक्षपाती राज्य है और राज्य में कोई विश्वास नहीं है.
न्यायमूर्ति कांत ने कहा, “किसी विशेष राज्य में जहां मुकदमे चल रहे हों, गवाह मौजूद हों, वहां माहौल हमेशा तनावपूर्ण बना रहेगा. दुर्भाग्य से, राज्य सरकार, विपक्ष आप पर आरोप लगाता रहेगा, क्योंकि अदालत की ओर से देरी हो रही है…” पीठ ने राज्य के वकील से निर्देश लेने को कहा, जिस पर राज्य के वकील सहमत हो गए.
सर्वोच्च न्यायालय ने बालाजी को सितंबर 2024 में धन शोधन के एक मामले में जमानत दी थी. यह इस समझ पर आधारित था कि पद से इस्तीफा देने के बाद बालाजी अब मंत्री नहीं रहे. बाद में बालाजी को मंत्री पद पर बहाल कर दिया गया. जिसके बाद उनकी ज़मानत वापस लेने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में एक आवेदन दायर किया गया. 23 अप्रैल को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उनके खिलाफ कड़ी टिप्पणियों के बाद बालाजी ने दूसरी बार मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.
• *_गुजरात में बड़ा हादसा : 80 साल पुरानी इमारत गिरी, मां-बेटी समेत तीन की मौत, दो घायल_*
गिर सोमनाथ (गुजरात) : गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के वेरावल शहर में देर रात 80 साल पुरानी तीन मंजिला जर्जर इमारत के अचानक ढह जाने से तीन लोगों की मौत हो गई और दो अन्य को बचा लिया गया.इमारत गिरने से मलबे में दबने से एक मां और बेटी के अलावा बाइक सवार समेत तीन लोगों की मौत हो गई.
पुलिस के मुताबिक हादसा वेरावल के खारवाड इलाके में स्थित आवासीय इमारत में देर रात करीब डेढ़ बजे हुआ. इस दौरान उस इलाके से गुजर रहा बाइक सवार भी इसके चपेट में आ गया जिससे मलबे में दब जाने से उसकी मौत हो गई. वहीं हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई.
मलबे से 3 शव निकाले गए
खारवाड इलाके में एक मकान के ढहने की सूचना मिलने पर, अग्निशमन विभाग, पुलिस और नगर पालिका की टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और बचाव अभियान सुबह तक जारी रहा. प्रशासन की कड़ी मशक्कत के