रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बॉक्स तक नदारद

प्राथामिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए हर साल सितंबर के दूसरे शनिवार को विश्व प्राथमिक उपचार दिवस मनाया जाता है। शनिवार को ‘हिन्दुस्तान’ टीम ने रोडवेज बसों की पड़ताल की तो 80 फीसदी रोडवेज की बसों से फर्स्ट एड बॉक्स गायब मिले और कुछ में लगे भी थे तो उसमें मलहम-पट्टी व अन्य सामग्री ही गायब थी।वहीं सड़कों पर फर्राटे भरने वाली डग्गारमार बसों में तो एक में भी फर्स्ट एड बॉक्स नहीं मिला। ऐसे में यदि आपातकाल में चालक, परिचालक या फिर यात्री को दवाई की आवश्यकता पड़ती है तो उसे समय पर दवाई मिल पाना मुश्किल होगा।
उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के जिले में 93 बसों का बेड़ा है। इनमें 42 दोहरीघाट और 51 मऊ डिपो से बसें संचालित होती हैं। शासन के निर्देशानुसार हर बस में आपात स्थिति में उपयोग आने वाली दवाइयों का फर्स्ट एड बॉक्स में रखना जरूरी है, जिनमें सिर दर्द, पेट दर्द, उल्टी समेत चोट लगने की स्थिति में प्राथमिक उपचार की स्थिति के लिए बैंडेज, एंटीसेप्टिक लिक्विड, रूई, पट्टी आदि का रखना आवश्यक है। हिंदुस्तान टीम ने जब रेलवे स्टेशन स्थित बस स्टैंड पर बसों के अंदर रखे गए फर्स्ट एड बाक्स की पड़ताल की तो दवाइयों के स्थान पर अन्य गैर जरूरी चीजें मिलीं। यहां तक की जनरथ बस के फर्स्ट एड बॉक्स पूरी तरह खाली मिले तो साधारण बसों में रखे गए फर्स्ट एड बॉक्स में पॉलीथीन, माचिस, प्लास्टिक की रस्सी समेत अन्य सामान मिला। कुछ बसों में फर्स्ट एड बाक्स भी गायब मिले। ऐसे में जरा सी लापरवाही बस संचालक, परिचालक के साथ-साथ यात्रियों पर भी भारी पड़ सकती है।

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