शिब्ली नेशनल कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभाग ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर किया राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

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आजमगढ़ से अब्दुर्रहीम शेख़ की रिपोर्ट

आज दिनांक 10 दिसंबर को शिब्ली नेशनल महाविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के तत्वाधान में एक दिवसीय ” अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस ” पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया । जिसमें मुख्य वक्ता अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय राजनीति विज्ञान विभाग के प्रो. मोहम्मद मोहिबुल हक रहे । गोष्ठी की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अफसर अली ने की ।
अन्य वक्ताओं में प्रो. शिल्पा त्रिपाठी विभागाध्यक्षा राजनीति विज्ञान विभाग डी. ए. वी. कॉलेज , डॉ. नितेश जायसवाल विभागाध्यक्ष राजनीति विज्ञान विभाग
श्री गांधी पी. जी. कॉलेज मालटारी ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए ।
इस दौरान प्रो. मोहियुद्दीन आजाद , प्रो. कलीम अहमद , डॉ. सीमा शादिक , डॉ. शगुफ्ता खानम , डॉ. जर्रार और डॉ. अबू राफे उपस्थित रहे ।

कार्यक्रम की शुरुआत उस्मान सानी के तिलावते कलाम पाक से हुई । स्नेहा गुप्ता ने मुख्य वक्ता प्रो.मोहम्मद मोहिबुल हक को अपने हाथों से बनाई हुई तस्वीर भेंट की । तत्पश्चात राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शफीउज्जमां ने अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ देकर किया और साथ ही गोष्ठी का विषय परिवर्तन करते हुए कहा कि अधिकार सामाजिक जीवन की आवश्यकता है जिनके बिना न तो व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकता है और न ही समाज के लिये उपयोगी कार्य कर सकता है । अधिकारों के बिना मानव जीवन के अस्तित्व की कल्पना नहीं की जा सकती है । राष्ट्र का सर्वोत्तम लक्ष्य व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास करना है । अमेरिकी तथा फ्रांसीसी क्रांतियों के बाद मानव अधिकारों की जो घोषणा हुई उसके द्वारा मानव के महत्वपूर्ण अधिकारों को स्वीकार किया गया । मानवाधिकार केवल कोरी संकल्पना नहीं है बल्कि यह मानव जीवन से जुड़ी वह मूलभूत आवश्यकता है जिसकी पूर्ति किए बिना गरिमापूर्ण जीवन का उद्देश्य प्राप्त नहीं किया जा सकता है ।

मुख्य वक्ता प्रो. मोहम्मद मोहिबुल हक ने अपने उद्बोधन में समाज के नैतिक मूल्यों के संदर्भ में पश्चिमी और भारतीय सभ्यता की तुलना करते हुए कहा कि हमारी सभ्यता में परिवार को मुख्य भूमिका के रूप में देखा जाता है । उनका मानना है कि मानवाधिकार केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता तक नहीं बल्कि इसमें सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अधिकार भी शामिल है । सामाजिक समस्याओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह किसी विशेष राष्ट्र या वर्ग का मुद्दा नहीं है। बल्कि यह पूरे मानवता के लिए साझा और मौलिक अधिकार हैं जिसे संरक्षित एवं सम्मानित करना चाहिए। उनका कहना है कि मानवाधिकार दिवस मनाने का मकसद सिर्फ अनुच्छेदों और अधिकारों को किताबी रूप में रट लेना नहीं है बल्कि उसको अपने जीवन में इस रूप उतरना है कि जिससे कि संपूर्ण राष्ट्र में मानवता का संदेश जा सके ।
अंत में उन्होंने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि हमें अधिकारों को सभी लोगों में उनकी जरूरत के हिसाब से समान रूप से लागू करना चाहिए।

डॉ. अलाउद्दीन खां ने अपने वक्तव्य व्यक्त करते हुए कहा कि आज का दिन हमें प्रेरित करता है कि हम एक न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज की ओर कदम बढ़ाएं, जहां हर व्यक्ति को स्वतंत्रता, समानता और सम्मान मिले। हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि हम किसी भी रूप में भेदभाव, अत्याचार और असमानता के खिलाफ खड़े होंगे, ताकि हमारा समाज हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित और समृद्ध हो।

अन्य वक्ताओं में डॉ. नितेश जायसवाल ने समानता पर बल देते हुए कहा कि भावनाएं ही सभी मनुष्य को एक बनाती है । उन्होंने कहा कि कभी – कभी कानून भी अन्यायपूर्ण होता है । इसलिए जितनी भी क्रांतियां हुई है सभी अन्याय के खिलाफ हुई है ।

प्रो. शिल्पा त्रिपाठी ने सामाजिक न्याय और समानता पर चर्चा करते हुए कहा कि सत्य एक ही है और अगर सभी व्यक्ति सत्य के हिसाब से चलने लगेंगे तो हमें असमानता और अधिकार की बात नहीं करनी पड़ेगी । उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा सिर्फ एक नैतिक कर्तव्य नहीं है, बल्कि यह समाज की समृद्धि और शांति के लिए भी आवश्यक है।

तकनीकी सत्र का संचालन डॉ. जफर आलम ने किया । जिसमें छात्र-छात्राओं ने पैनल विचार विमर्श में “डिजिटल युग में मानवाधिकार” पर चर्चा की । जिसमें प्रांजलि सिंह , प्रिंस कुमार मौर्य, शमा अफरोज , सुषमा पाण्डेय, फलक तबरेज , रुचि मौर्या और कल्पना यादव शामिल रहीं ।

दूसरे पैनल के विचार विमर्श में ” सामाजिक न्याय और समानता” पर प्रो. शिल्पा त्रिपाठी , डॉ. नितेश जायसवाल, डॉ. अलाउद्दीन खां , डॉ. शफीउज्जमां , डॉ. जफर आलम , डॉ. शफकत उस्मानी ने अपने विचार प्रस्तुत किए ।

इस संगोष्ठी को सफल बनाने में स्नातकोत्तर राजनीति विज्ञान विभाग के समस्त छात्र-छात्राओं का सहयोग रहा । जिसमें विशेष रूप से दिव्यशक्ति कुमार गौतम, मोहम्मद सरफराज, प्रांजलि सिंह , समरीन खातून, आकाश सोनी , अनुपमा मिश्रा ,नम्रता सिंह , फ़खरा नदीम , प्रज्ञा मिश्रा , प्रियंका यादव , नेहा गुप्ता , प्रिंस कुमार मौर्य, शाहिबा खातून , शमा अफरोज, अखिल , हरिद्वार यादव, रेशम अफरोज , अक्षय गुप्ता , अनिल चौरसिया , उमम अशफाक, प्रिया जायसवाल, सुषमा पाण्डेय, आलोक शर्मा , मोहम्मद फैज , सृष्टि शर्मा, शिफा शेख, शिवांगी सिंह, मोहम्मद आजम , संजय प्रजापति, ऐश्वर्या वर्मा , अल्फिया नईम, गुलाम रसूल आदि की उपस्थिति एवं योगदान सराहनीय रहा ।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य प्रो. अफसर अली ने आये हुये अतिथियों के प्रति आभार ज्ञापित करते हुये विभाग को इस तरह के कार्यक्रम के लिए प्रोत्साहित किया ।
अंत में आभार ज्ञापन डॉ. जफर आलम ने किया ।
संगोष्ठी का सफल संचालन डॉ. शफीउज्जमां व डॉ. जफर आलम द्वारा किया गया ।

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