काशी में शिवपुराण का छठा दिन : पंडित शिवम विष्णु पाठक ने भगवान शिव के 11वें अवतार हनुमान जी की महिमा का किया वर्णन, भक्तिरस में डूबे शिवभक्त, विश्वनाथ मंदिर के प्रमुख अर्चक ने किया विशेष सम्मान
वाराणसी। श्री शृंगेरी मठ, महमूरगंज, वाराणसी में 12 से 18 जुलाई तक आयोजित हो रही श्री शिवपुराण कथा अपने छठे दिन भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के चरम पर पहुंची। कोलकाता से पधारे प्रख्यात कथा व्यास श्रीकृष्ण अनुरागी पंडित शिवम विष्णु पाठक ने कथा के छठे दिवस पर जलंधर और वृंदा की दिव्य कथा का मार्मिक वर्णन किया। इसके साथ ही, भगवान शिव के ग्यारहवें अवतार के रूप में पूजनीय श्री हनुमान जी की महत्ता पर विशेष प्रकाश डाला, जिसने संतों और भक्तों से परिपूर्ण सभागार को भक्ति रस में डुबो दिया।
इस अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रमुख अर्चक श्रीमान श्रीकांत मिश्रा जी, महंत श्री सच्चिदानंद जी, चिंतामणि से पधारे सुब्बाराव जी और जितेंद्रानंद स्वामी सरस्वती जी जैसे संतों की उपस्थिति ने कथा को और अधिक पवित्र बनाया। महंत श्री सच्चिदानंद जी ने व्यास मंच की मंगल कामना की, जबकि सुब्बाराव जी ने कथा व्यास को आशीर्वाद प्रदान किया। भक्तों से खचाखच भरे पंडाल में भजनों और कथा का रसपान करते हुए श्रोता भाव-विभोर हो उठे।
छठे दिवस का आध्यात्मिक उत्साह
छठे दिन की कथा में पंडित शिवम विष्णु पाठक ने जलंधर और वृंदा की कथा के माध्यम से भगवान शिव की लीलाओं और उनकी कृपा का वर्णन किया। इस प्रसंग में शिव की दयालुता और भक्तों के प्रति उनके प्रेम को दर्शाया गया। इसके साथ ही, हनुमान जी को भगवान शिव का रुद्रावतार बताते हुए उनकी भक्ति, शक्ति और निस्वार्थ सेवा की महिमा का विस्तृत वर्णन किया। पंडित जी ने बताया कि हनुमान जी, जो भगवान राम के परम भक्त हैं, शिव के अवतार के रूप में सनातन धर्म में पूजनीय हैं। उनकी भक्ति और बल की कथाएं भक्तों को प्रेरणा देती हैं।
रुद्राभिषेक यज्ञ और काशी की महिमा
कथा के साथ-साथ प्रतिदिन प्रातःकाल काशी के विद्वानों की कृपा से रुद्राभिषेक यज्ञ का आयोजन भी हो रहा है, जिसमें सभी यजमान उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। पंडित जी ने रुद्राभिषेक को न केवल आध्यात्मिक उन्नति का साधन बताया, बल्कि इसे जीवन की नकारात्मकता को दूर करने का प्रभावी उपाय भी कहा। काशी को शिव की नगरी बताते हुए उन्होंने मणिकर्णिका घाट को सर्वोपरि तीर्थ के रूप में स्थापित किया और भक्तों से इसकी महत्ता को समझने का आह्वान किया।
सप्तम दिवस का आगामी महत्व
कथा के सप्तम और अंतिम दिन (18 जुलाई), जो विश्राम दिवस के रूप में मनाया जाएगा, अनेक महत्वपूर्ण प्रसंगों का वर्णन होगा। पंडित शिवम विष्णु पाठक ने संकेत दिया कि इस दिन भगवान शिव की विभिन्न लीलाओं और उनके भक्तों के प्रति कृपा के प्रसंगों को विस्तार से सुनाया जाएगा। यह दिन भक्तों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह कथा का समापन दिवस होगा, जिसमें शिव की महिमा और भक्ति का संदेश और गहराई से प्रस्तुत किया जाएगा।
भक्तों का उत्साह और आयोजन की विशेषताएँ
इस सामूहिक शिवपुराण कथा में भारतवर्ष के विभिन्न क्षेत्रों से आए भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है। मुख्य यजमान कोलकाता का प्रहलादका परिवार है, जिनके सहयोग से यह भव्य आयोजन संभव हुआ। पंडाल में भक्तों ने शिव कथा और भजनों का पूर्ण आनंद लिया, और कथा व्यास की विद्वता और भक्ति से प्रभावित होकर श्रोता बार-बार तालियों से उनका उत्साहवर्धन करते रहे।
यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि काशी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। भक्तों के लिए यह कथा शिव की कृपा प्राप्त करने और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का एक अनुपम अवसर है।