सिगरा थाना अंतर्गत रोडवेज चौकी एक बार फिर सुर्खियों में है

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वाराणसी पुलिस का नया कीर्तिमान

और वजह वही पुरानी बस कहानी थोड़ी अपग्रेडेड!

पिलर नंबर 49 के पास जहाँ से वाराणसी से प्रयागराज जाने वाली अवैध टैक्सी स्टैंड सालों से चल रही थी
अब फिर से नए जोश और पुराने होश के साथ शुरू हो चुकी है।
फर्क बस इतना है कि अब इस साम्राज्य की डोर बाबा के हाथों में है।

कभी सिगरा थाने में चर्चा में रहे, तो कभी जीआरपी कैंट में
और अब वाराणसी में मानव रूपी इच्छाधारी बाबा बनकर सक्रिय हैं।
कहते हैं चौकी प्रभारी कोई भी हो, पर सिक्का तो बाबा का ही चलता है!

नियम कानून चौकी और थाने की पोस्टिंग बदलती रहती है
मगर बाबा की सत्ता स्थायी है।

वाहन माफिया पांडे का नाम जरूर बदला है,
पर खेल वही पुराना है।
अब उनके सहयोगी नए नाम से, उसी पिलर नंबर 49 पर
वही पुराना धंधा फिर से ज़ोरों पर है।

रात के अंधेरे में टैक्सियाँ दौड़ती हैं,
दिन के उजाले में वसूली होती है,
और पुलिस बस कैमरे के फ्रेम में नज़र आती है।

कहते हैं वाराणसी पुलिस पर आरोपों की लंबी फेहरिस्त है,
पर कार्यशैली में एक प्रतिशत सुधार भी नहीं दिखता।
अवैध वसूली के इस चक्र में हर स्तर का अधिकारी ऐसे फंसा है,
जैसे यहाँ सिस्टम नहीं, सिंडिकेट चलता हो।

अब देखने वाली बात यह होगी कि
क्या इस बार वाराणसी पुलिस कमिश्नर की नज़र
पिलर नंबर 49 तक पहुँचेगी
या फिर बाबा की कमान में यूँ ही चलता रहेगा यह वाहन साम्राज्य।

क्योंकि वाराणसी में अब कानून नहीं, कनेक्शन चलता है!
यहाँ अपराध नहीं रुकता बस एंगल बदलता है,
क्योंकि वाराणसी पुलिस अब जांच नहीं, जुगाड़ में विश्वास रखती है।

जहाँ वर्दी की कीमत सिक्कों से तय हो
वहाँ कानून सिर्फ फोटो में दिखता है!

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