रुदौली,अयोध्या ! रुदौली की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। मामला दलित समाज के कुछ लोगों पर दर्ज कथित फर्जी चोरी के मुकदमे का है, जिसने सत्तारूढ़ दल के भीतर ही हलचल मचा दी है। बुधवार को इसी प्रकरण को लेकर चौधरी समाज के सैकड़ों लोग धरने पर बैठ गए। चौंकाने वाली बात यह रही कि इस धरने में भाजपा जिला महामंत्री राधेश्याम त्यागी और रुदौली विधायक रामचंद्र यादव भी शामिल हुए।यानी अपनी ही सरकार के खिलाफ पार्टी के नेता और विधायक धरने पर बैठ गए।धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए एफआईआर वापस लेने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। समाज के लोगों का कहना है कि वीरांगना झलकारीबाई जयंती (22 नवंबर) की तैयारी के दौरान सफाई कार्य में जुटे समाज के कुछ लोगों पर द्वेषवश फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया।इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी आमंत्रित किया गया है, ऐसे में यह विवाद राजनीतिक रूप ले चुका है।सूत्रों के मुताबिक, इस प्रकरण की शिकायत पहले ही विधायक, अनुसूचित मोर्चा के जिलाध्यक्ष और नगर अध्यक्ष द्वारा मुख्यमंत्री से की जा चुकी थी। बावजूद इसके एफआईआर दर्ज होने से समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है। धरना स्थल पर चौधरी समाज के लोग सरकार से न्याय की गुहार लगाते दिखे।रुदौली की सियासत में यह घटनाक्रम बड़ा मोड़ माना जा रहा है। अपनी ही सरकार में पार्टी के पदाधिकारी और विधायक का धरने पर बैठना चर्चा का विषय बन गया है।गौरतलब है कि इससे पहले भी रुदौली विधायक रामचंद्र यादव ने एसडीएम विकास धर दूबे की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उनके ट्रांसफर की मांग एडी से लेकर चोटी तक उठाई थी। अब वही विधायक अपनी ही सरकार में धरने पर बैठे हैं।जिससे साफ है कि रुदौली की राजनीति में अंदरखाने घमासान मचा हुआ है।रुदौली में इस समय चौधरी समाज की नाराजगी और भाजपा नेताओं का विरोध प्रदर्शन व विधायक का खड़यंत्र दोनों ने मिलकर स्थानीय सियासत की सूरत बदल दी है।
*सोचनीय*
सोचनीय यह है कि विधायक समेत भाजपाई धरने पर बैठे उपजिलाधिकारी के खिलाफ जबकि तहरीर अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत कामाख्या धाम ने दिया तब जाकर मुकदमा दर्ज हुआ धरना तो अधिशासी अधिकारी के विरुद्ध होना चाहिए लेकिन यहाँ तो उल्टा चोर कोतवाल को डाटने वाली कहावत हाबी है, सच तो यह है कि गाटा संख्या-223 जो राजस्व अभिलेख में देवस्थान के नाम दर्ज जमीन है पर कोरी समाज का धर्म शाला बना जरूर है लेकिन आधिपत्य कोरी समाज नही जमा सकता, जमीन देव स्थान की है तो पहली बात कोरी समाज ने उक्त जमीन पर धर्मशाला का निर्माण कराकर गलत किया, इस कार्य के लिए इस समाज को पहले जमीन खरीदना था बाद में धर्मशाला बनवाते खुद की खरीदी जमीन पर, दूसरी बात जमीन देवस्थान की है तो उसपर जो पेंड उगे हैं उनपर कोरी समाज का आधिपत्य कैसे हुआ, लेकिन कोरी समाज उन पेड़ों को बेचकर धर्मशाला को नया रूप देना चाहता था और आज भी चाहता है। इस समाज के अलावा अन्य समाज के लोग भी धर्मशाला का बढावा चाहते हैं लेकिन देवभूमि के जमीन के पेड़ों के बिक्री के धन से नहीं उसमें तो कोरी समाज को निजी धन लगाना चाहिए, लेकिन यहाँ तो उल्टा धारा बह रही है और समर्थक सत्ताधारी दल के कर्णधार हैं।