सत्य सवेरा ब्यूरो अमेठी
संग्रामपुर। प्रतिवर्ष 15 से 21 नवंबर तक मनाए जाने वाले राष्ट्रीय नवजात शिशु देखभाल सप्ताह के तहत बुधवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संग्रामपुर में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में धात्री महिलाओं को नवजात शिशुओं की देखभाल, स्वास्थ्य सुरक्षा व आवश्यक सतर्कताओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
बैठक की अध्यक्षता सीएचसी प्रभारी डॉ. संतोष सिंह ने की। उन्होंने बताया कि नवजात अवस्था जीवन के पहले 28 दिन होती है, जो शिशु के जीवित रहने के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय है। इस अवधि में मृत्यु का जोखिम सबसे अधिक होता है, इसलिए माताओं को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि शिशु स्वास्थ्य को मजबूत करना ही मृत्यु दर को कम करने का सबसे प्रमुख उपाय है।
महिला चिकित्सक डॉ. गौड़ ने कहा कि हर नवजात शिशु उच्च गुणवत्ता वाली सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल का अधिकार रखता है। शिशु को सामान्य रूप से सांस लेने, उचित गर्माहट बनाए रखने, पौष्टिक आहार और संक्रमण से सुरक्षा की आवश्यकता होती है। उन्होंने प्राथमिक नवजात देखभाल को सभी प्रसूताओं के लिए अनिवार्य बताया।
नर्स रेखा वर्मा ने कार्यक्रम में आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि लगभग 35% बच्चे जीवन के पहले महीने में उचित शारीरिक विकास की कमी के कारण और 33% नवजात संक्रमण के कारण मृत्यु का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में जागरूकता ही इन समस्याओं को कम कर सकती है।
सीएचसी प्रभारी डॉ. संतोष सिंह ने कहा कि सप्ताहभर चलने वाले इस जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य नवजात मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर तक लाना है। उन्होंने बताया कि नवजात संक्रमण से 33%, श्वसन संबंधी समस्याओं से 20% और जन्मजात विकृतियों के कारण 9% शिशुओं की मृत्यु होती है। इस सप्ताह के आयोजन से जागरूकता बढ़ी है और शिशु मृत्यु दर में कमी दर्ज की गई है।
कार्यक्रम में एआरओ संतोष यादव, बीपीएम शंभूनाथ पांडेय, बीसीपीएम तीर्थराज यादव, आशा संगिनी कमलेश सिंह, समस्त आशा बहुएँ तथा बड़ी संख्या में धात्री महिलाएँ उपस्थित रहीं।