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स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन के लिए कुछ संदेश - Saty Savera

स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन के लिए कुछ संदेश

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स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन के लिए कुछ संदे

*”पराधीन सपनेहु सुख नाहिं”*

 

बलिया-इस धरा धाम पर आए मनुष्यों जब तक संभव न हो किसी की भी सेवा ना ले। ईश्वर करे जब तक जीवन रहे किसी की सेवा ना लेनी पड़े क्योंकि दूसरों से सेवा करवाने से पूण्य क्षीण होता है। दूसरे लोग हमें प्रणाम करें नमस्कार करें हमारा सम्मान करें ऐसी आकांक्षा और रुचि रखता सर्वथा उचित नहीं कहा जा सकता। जो व्यक्ति दूसरों को सम्मान प्यार देता है उसे प्रतिक्रिया के रूप में प्यार इज्जत और सम्मान अनायास से मिल जाता है। अपने अंदर सद्गुणों का विकास ही आध्यात्मिक विकास है। उसमे जहां भी कमी महसूस हो उसे ठीक करने का पूरा प्रयास करना चाहिए। कड़वी और कठोर वाणी जो दूसरों को कष्ट पहुंचाए नहीं बोलनी चाहिए हमेशा मृदभाषी और मधुरता और अपनेपन का व्यवहार करें स्वच्छता मुस्कुराहट और मधुर व्यवहार सुंदरता की सबसे बड़ी कसौटी है। अत्यधिक फैशन में समय को अपने हाथ से निकलने ना दे। जीवन ‘समय’ से बना है जो समय को आलस में व्यर्थ में बैठकर बर्बाद करते हैं वह अपने पूरे जीवन को बर्बादी की कहानी लिखते हैं। स्वयं अपने परिवार, समाज, देश, धर्म और संस्कृति के प्रति अपने कर्तव्य का पालन करना ही सर्वश्रेष्ठ है। श्रम एक देवता है श्रम से कभी जी नहीं चुराना चाहिए। शरीर वस्त्र घर और वस्तुओं को स्वच्छ और अच्छी तरह से रखना चाहिए। अपने विचारधारा और कार्य प्रणाली को अपने बुद्धि के अनुसार निर्धारित करना चाहिए।

सप्ताह में एक समय का उपवास, जल्दी सोने और भगवान भास्कर के उदय होने से पूर्व जागने का अभ्यास करना चाहिए। देर से सोना विभिन्न प्रकार के रोगों का कारण बनते हैं किसी भी स्थिति में सात -आठ घंटे नींद लेनी चाहिए। आय से कम में परिवार का खर्च चलायें बचत की असली आय हैं। अपने जीवन शैली में व्यायाम, प्राणायाम, योगासन और ध्यान के लिए समय अवश्य निकालना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति एक आजाद ‘संस्था’ है उसे आगे बढ़ाने के लिए पूरी छूट होनी चाहिए लेकिन नैतिकता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। ज्यादा बोलना भी परिवार और समाज में कलह का कारण बनता है जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती जाए मौन साधना का अभ्यास करना चाहिए। केवल शारीरिक माैन ही नहीं मानसिक मौन का अभ्यास करना चाहिए। अपने परिवार में मधुरता लाने के लिए एक दूसरे की गलतियों को क्षमा करना चाहिए। किसी के भी जीवन में बदलाव लाने के लिए प्यार और अपनापन के व्यवहार से ही लाया जा सकता है कठोरता का व्यवहार इसमें असफल हो जाती है।

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