बलिया। जिले में निवास करने वाले गोंड, खरवार समुदाय को राष्ट्रपतीय राजपत्र द्वारा अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता दी गई है! भारत सरकार की जनगणना 2011 के अनुसार बलिया में अनुसूचित जनजाति गोंड, खरवार की जनसंख्या एक लाख दस हजार से ज्यादा दर्ज है! शासनादेश द्वारा भी इन्हें अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया गया है का अनुपालन कराने की मांग को लेकर ऑल गोंडवाना स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आगसा) के तत्वावधान में बलिया कलेक्ट्रेट मॉडल तहसील पर 30 अप्रैल 2025 को भी जारी रहा! गोंड महासभा के संरक्षक लल्लन गोंड ने कहा कि गोंड जाति प्रमाण पत्र का मुद्दा संसद से लगायत विधान सभा तक उठा इसके बावजूद भी बलिया जिलाधिकारी द्वारा संज्ञान न लेना भारत के राजपत्र संविधान शासनादेश की घोर अवमानना है! ऐसी स्थिति में जनजाति गोंड विरोधी मानसिकता से ग्रसित ऐसे जिलाधिकारी को तत्काल प्रभाव से हटाया जाना चाहिए! जनजाति गोंड छात्रों का जाति प्रमाण-पत्र जारी न करना इनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करना है! अंग्रेजी सरकार में बलिया जिले में निवास करने वाली गोंड जाति की जनगणना ट्राइब में की गयी है! उस समय के थानों पर स्थित जन्म-मृत्यु रजिस्टर फौती में भी गोंड ही अंकित है! आजादी के पूर्व के भू-राजस्व अभिलेखों में स्पष्ट रूप से गोंड ही अंकित है जो आज भी कलेक्ट्रेट में सुरक्षित है! इसके बावजूद भी भारत के राजपत्र संविधान शासनादेश की घोर अवमानना करते हुये, मनगढ़ंत गलत आख्या लगाकर आदिवासी जनजाति गोंड की जाति बदलने का षडयंत्र कर रहे हैं लेखपाल व तहसीलदार और इसमें जिलाधिकारी भी संलिप्त हैं! आगे कहा कि 1942 अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बैरिया थाने पर रामजन्म गोंड शहीद हुये थे और कई गोंड स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी रहे हैं! रामजन्म गोंड जी के स्वतंत्रता संग्राम गाथा से गोंड समुदाय को प्रेरणा लेकर लोकतांत्रिक तरीके से अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने के लिए सतत् संघर्षरत रहने की आवश्यकता है! इस दौरान प्रमुख रूप से लल्लन गोंड, अरविंद गोंडवाना, क्षेत पंचायत सदस्य राकेश कुमार यादव, सुरेश शाह,संजय गोंड, सुमेर गोंड, मनोज गोंड, सूचित गोंड, बच्चा लाल गोंड, कृष्णा कुमार, विश्वनाथ गोंड, अवधेश गोंड, प्रेम चन्द गोंड, शिवजी गोंड, शिवशंकर गोंड, श्रीपति गोंड, कौशल कुमार गोंड, आदि लोग धरना प्रदर्शन मे मौजूद रहे।