आजमगढ़ से उठा एक गंभीर सवाल: क्या सिंचाई विभाग का भ्रष्टाचार ब्यूरोक्रेसी को चुनौती देना चाहता है?
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था को सवालों के घेरे में ला दिया है, बल्कि इंजीनियर बिरादरी में बैठे भ्रष्ट तत्वों की हिम्मत को भी उजागर किया है।
मामला सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता अरुण सचदेवा से जुड़ा है। जिलाधिकारी आजमगढ़ द्वारा 27 मई को विभागीय निरीक्षण के दौरान अरुण सचदेवा की उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने का निर्देश पूर्व में ही जारी किया गया था। लेकिन अधिशासी अभियंता बिना किसी सूचना के अनुपस्थित रहे। इसके बाद डीएम ने नियम अनुसार उनके वेतन की कटौती का आदेश पारित किया।
यहीं से शुरू हुआ असली खेल।
वेतन कटौती की कार्रवाई के बाद अरुण सचदेवा ने डीएम के खिलाफ ही आरोप-पत्र भेज डाला। उन्होंने दावा किया कि उन्हें कैंप कार्यालय में बुलाकर मारपीट और शोषण किया गया। लेकिन ना तो कार्यालय में इसका कोई सीसीटीवी फुटेज मौजूद है, ना ही अभियंता के शरीर पर कोई चोट के निशान पाए गए।
इतना ही नहीं, इंजीनियर यूनियन अब खुलेआम डीएम के खिलाफ लामबंद हो रही है। सवाल यह नहीं है कि किसके साथ क्या हुआ, असली सवाल यह है कि यदि एक अधिशासी अभियंता नियम की अनदेखी कर रहा है और जब उस पर कार्रवाई होती है तो वह खुद को पीड़ित बताकर पूरे सिस्टम को ही कठघरे में खड़ा कर देता है, तो फिर प्रशासन कैसे काम करेगा?
पड़ताल में सामने आई बड़ी सच्चाई
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, अरुण सचदेवा की कार्यशैली और इतिहास में गंभीर अनियमितताओं के प्रमाण पहले से मौजूद हैं। कई निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की भारी शिकायतें रही हैं, और वित्तीय लेन-देन में भी संदेहास्पद गतिविधियाँ चिन्हित की गई हैं।
इंजीनियर बिरादरी पर उठते सवाल
यह कोई पहला मामला नहीं है। जो इंजीनियरिंग के ‘प्रयोग’ नजर आते हैं, वे खुद इंजीनियर बिरादरी की कार्यशैली की पोल खोलते हैं। आज ज़रूरत है कि ऐसे मामलों पर सरकार मूल्यांकन आधारित हस्तक्षेप करे और यह तय करे कि सही कौन है और गलत कौन।
अब वक्त आ गया है
सरकार को चाहिए कि वो प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमा और नियमों की रक्षा करते हुए ऐसे ‘संगठित दबाव’ के खिलाफ सख्त रुख अपनाए।
क्योंकि यदि नियमों के पालन कराने पर अधिकारियों को ही आरोपों का शिकार बनाया जाने लगेगा, तो फिर उत्तर प्रदेश में ईमानदारी और सुशासन की कल्पना भी असंभव हो जाएगी।