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यूपी के इटावा की घटना कोई जातीय झगड़ा नहीं है यह यादवों को सत्य सनातन धर्म से तोड़ने की बड़ी गहरी साजिश है,, - Saty Savera

यूपी के इटावा की घटना कोई जातीय झगड़ा नहीं है यह यादवों को सत्य सनातन धर्म से तोड़ने की बड़ी गहरी साजिश है,,

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यह कहानी श्री मद भागवत कथा की नहीं है,कहानी शुरू होती है समाजवादी पार्टी के डर से।महेवा ब्लॉक इटावा एक साधारण सा गाँव,और भागवत कथा का आयोजन,कथा वाचक– यादव समाज से,लेकिन जैसे ही कथा शुरू होती है,कुछ लोग उठते हैं और कहते हैं कि “तू ब्राह्मण नहीं है तू कथा नहीं कर सकता” फिर वीडियो रिकॉर्ड होता है,फिर सोशल मीडिया पर फैलाया जाता है,और शुरू हो जाता है फिर —’ब्राह्मण बनाम यादव’ का ज़हर।

अगर आप सोच रहे हैं कि ये बस जाति वाद की घटना थी तो आप उस जाल को नहीं देख पा रहे हैं जो बिछाया गया है।

यह घटना नहीं स्क्रिप्ट है और इसकी स्क्रिप्ट समाजवादी पार्टी ने बहुत पहले लिखी थी,क्योंकि उन्हें अब डर है कि यादव अब आंख खोल चुका है।
यादव पूछ रहा है “हमें क्या मिला सपा की इस मुस्लिम परस्ती से?” यादव अब श्रीकृष्ण का नाम लेता है न कि सेकुलरिज़्म का ढोंग,और यही सबसे बड़ा खतरा है,समाजवादी पार्टी के लिए।अब सच्चाई सुनिए सपा जानती है कि यादवों का झुकाव अब राम,राष्ट्र और धर्म की ओर हो रहा है।

इसलिए इटावा जैसी घटनाएँ रची जाती हैं।मंच पर कथा चल रही थी और पीछे स्क्रिप्ट तैयार थी।

इस घटना में असली अपमान किसका हुआ ? न कथावाचक का,न जाति का,बल्कि अपमान हुआ तो पूरे सनातन धर्म का,जिसे तोड़ने की कोशिश की गई।

साजिश तो साफ़ है,एक यादव को जान बूझकर कथावाचक बनाकर भेजो,फिर कथित विरोध भी खड़ा करो,“ब्राह्मण नहीं है तू कथा मत सुना” फिर वीडियो बनाओ वायरल करो और आग लगाओ।फिर यादव समाज को कहो कि देखो ब्राह्मणों ने तुम्हें अपमानित किया, और अंत में उन्हें फिर समाजवादी पार्टी की गोदी में बिठा दो,लेकिन गलती कर दी उन्होंने क्योंकि अब यादव समाज वो नहीं रहा जो 90 के दशक में था,अब वो श्रीकृष्ण को याद करता है।अब वो खुद से पूछता है “कथा सुनाने से रोकने वाला सच में ब्राह्मण था या कोई एजेंट?” अब वो देखता है कि किसने उसका इस्तेमाल किया –कथा में भी राजनीति में भी।वो जान चुका है कि ब्राह्मण अगर विरोध करता तो क्या रामानंद ने रविदास को शिष्य बनाया होता?क्या भागवत कथा को केवल जाति से जोड़ा जा सकता है?या फिर श्रद्धा, भक्ति और कर्म से?

अब यह ब्राह्मण बनाम यादव नहीं है, राष्ट्र बनाम राजनीतिक विभाजन है,अब फैसला यादव समाज को ही करना है।
क्या आप श्रीकृष्ण के वंशज बनकर सनातन के रक्षक बनेंगे? या फिर अखिलेश के झूठे नरेटिव में फँसकर हिंदू समाज के खिलाफ खड़े होंगे?

इटावा जैसी घटनाएँ तो बार-बार होंगी,कभी कथा के मंच से, कभी किसी मंदिर में,कभी किसी छात्र की जाति के नाम पर,क्योंकि हिंदू समाज को तोड़ना ही उनका अंतिम एजेंडा है।

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