*प्रॉक्सी शिक्षक उपलब्ध कराता था आंधा का डॉक्टर*
– 40 से ज्यादा स्थानों पर पूरे देश में छापेमारी करते हुए सीबीआई ने साक्ष्य जुटाए और कई मेडिकल कॉलेज से दस्तावेज, कंप्यूटर हार्डड्राइव को कब्जे में लिया
– रिन्युअल लेटर और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए एकमुश्त ठेका उठाता था
– हरिप्रसाद के मेरठ एनसीआर कॉलेज समेत दक्षिण भारत के कई मेडिकल कॉलेज से संपर्क
– प्रॉक्सी शिक्षकों के बैंक खातों संबंधित जांच होगी
– एनएचए के ज्वाइंट डायरेक्टर को भेजी थी रिश्वत
– पूर्व एमएलसी की बेटी पर कस सकता है सीबीआई का शिकंजा
*मेरठ, प्रमुख संवाददाता।*
आंध्र प्रदेश के कदिरी का रहने वाला *डॉक्टर हरिप्रसाद* मेडिकल कॉलेजों को प्रॉक्सी शिक्षक उपलब्ध कराता था।इसका खुलासा सीबीआई जांच में हुआ है।
डॉ.हरिप्रसाद के साथ दो अन्य डॉक्टर भी मिलकर काम कर रहे हैं, जिन्हें आरोपी बनाया है।
खुलासा हुआ है कि डॉ. हरिप्रसाद कॉलेज को प्रॉक्सी डॉक्टर समेत उनके मान्यता समेत सभी दस्तावेज की फाइल को पूरा कराने की एवज में एकमुश्त रकम उठाता था।
सीबीआई, प्रॉक्सी शिक्षकों के बैंक खातों और रिकार्ड समेत फर्जी मरीजों की भी जांच करेगी।तमाम दस्तावेज को खंगाला जा रहा है।
मान्यता के लिए रिश्वत के नेटवर्क में हवाला कनेक्शन के जरिये रकम एक से दूसरी जगह भेजने वालों की तलाश की जा रही है।
सीबीआई ने देश के कई मेडिकल कॉलेजों को मान्यता देने के नाम पर रिश्वत लेने का खुलासा करते हुए बड़े नेटवर्क पर कार्रवाई की।
तीन डॉक्टरों समेत छह की गिरफ्तारी की गई।
सीबीआई के एसएसपी *कमल सिंह चौधरी* की ओर से कई मेडिकल कॉलेज के निदेशक, एनएमसी और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के 35 अधिकारियों को नामजद करते हुए मुकदमा दर्ज कराया था।
इन्हीं विभाग के कई अन्य कर्मचारियों को अज्ञात में आरोपी बनाया गया है, जिनका नाम विवेचना के दौरान खोला जाएगा।
इसी कार्रवाई के दौरान सीबीआई ने देश में 40 से ज्यादा स्थानों पर छापेमारी करते हुए साक्ष्य जुटाए और कई मेडिकल कॉलेज से दस्तावेज, कंप्यूटर हार्डड्राइव को कब्जे में लिया।
इसी क्रम में मेरठ की पूर्व एमएलसी और *भाजपा नेत्री सरोजनी अग्रवाल की बेटी शिवानी अग्रवाल* को भी नामजद किया गया।
शिवानी अग्रवाल मेरठ में एनसीआर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस कॉलेज की असिस्टेंट मैनेजिंग डायरेक्टर और रेडियोलॉजी विभाग की प्रमुख हैं।
सीबीआई ने खुलासा किया है कि इन सभी कॉलेजों को आंध्रप्रदेश के कदिरी निवासी डॉक्टर बी. हरिप्रसाद प्रॉक्सी शिक्षक उपलब्ध कराता था।
जिस भी कॉलेज को नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के सर्वे और दस्तावेज को लेकर समस्या होती थी, वह डॉ. हरिप्रसाद से संपर्क करता था।
डॉ. हरिप्रसाद की जिम्मेदारी थी कि वह प्रॉक्सी शिक्षक उपलब्ध कराए। कितने फर्जी मरीजों को वार्ड में रखना है, यह भी डॉक्टर बताता था। उनके फर्जी रिकार्ड तैयार किए जाते थे।
डॉ.हरिप्रसाद प्रॉक्सी शिक्षक देने समेत एनएमसी द्वारा सही रिपोर्ट और मान्यता समेत दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए एकमुश्त पैसा उठाता था।
रकम उठाने की जिम्मेदारी *डॉ. वीरेंद्र कुमार* के पास होती थी।
डॉ वीरेंद्र और डॉ. हरिप्रसाद दोनों साथ मिलकर काम करते हैं।
डॉ वीरेंद्र ने दक्षिण भारत में डॉ. बी. हरिप्रसाद के साथ मिलकर काम आगे बढ़ाया।
*डॉ. हरिप्रसाद के साथ डॉ. अनकम रामबाबू और डॉ. कृष्णा किशोर* भी काम करते हैं। इन सभी के बारे में जानकारी सीबीआई जुटा रही है।
*प्रॉक्सी शिक्षकों के बैंक खातों संबंधित जांच होगी*
प्रॉक्सी शिक्षकों को तनख्वाह समेत बाकी रिकार्ड फर्जीवाड़ा कर बनाए जाते थे।
फर्जी मरीजों की फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार की जाती थी।
सीबीआई इन कथित फर्जी शिक्षकों के बैंक खातों और उनके सभी लेनदेन की जानकारी जुटाएगी।
पता किया जाएगा खातों में कब और कहां से रकम आई और इसके बाद कहां गई।
जिन मरीजों को सर्वे के दौरान मेडिकल कॉलेजों में भर्ती दिखाया था, उनकी भी पहचान कर सत्यापन किया जाएगा।
*एनएचए के ज्वाइंट डायरेक्टर को भेजी थी रिश्वत*
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के ज्वाइंड डायरेक्टर और डिविजन हेड *डॉ. जीतूलाल मीणा* को डॉ. हरिप्रसाद और डॉ. वीरेंद्र कुमार ने रिश्वत भेजी थी।
सीबीआई ने एफआईआर में खुलासा किया है रिश्वत की रकम को पूनम मीणा, धर्मवीर, पीयूष माल्यन, अनूप इंद्रबाली मिश्रा ने डॉ. वीरेंद्र कुमार से उठाकर डॉ. जीतूलाल मीणा तक पहुंचाया था।
50 लाख विशाखापट्टनम के गायत्री मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर वेंकट से उठाई गई थी।
दरअसल, गायत्री मेडिकल कॉलेज की एक फाइल एनएमसी में रुकी हुई थी, जिसे पूरा कराने के लिए यह रकम डॉ. हरिप्रसाद ने तय की थी।
बाद में यह रकम डॉ. हरिप्रसाद के कहने पर डॉ. कृष्णा किशोर ने उठाई थी और हवाला के जरिये डॉ. वीरेंद्र तक पहुंचाई। बाद में डा. जीतूलाल तक यह रकम गई।
*पूर्व एमएलसी की बेटी पर कस सकता है सीबीआई का शिकंजा*
मेरठ, मुख्य संवाददाता। सीबीआई की ओर से पूर्व एमएलसी डॉ. सरोजनी अग्रवाल की बेटी शिवानी अग्रवाल समेत सभी 35 नामजद आरोपियों के खिलाफ शिकंजा कसने की तैयारी है।
माना जा रहा है कि जिस तरह छह आरोपियों को सीबीआई गिरफ्तार कर चुकी है, अब शिवानी अग्रवाल समेत अन्य को भी हिरासत में लेकर कार्रवाई की जा सकती है।
एनसीआर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइसेंज की असिसटेंट मैनेजिंग डायरेक्टर शिवानी अग्रवाल भी नामजद अभियुक्त हैं।
एक जुलाई को जब सीबीआई ने एनसीआर मेडिकल कालेज में छापेमारी की तो सबसे पहले शिवानी अग्रवाल से ही पूछताछ की गई।
उन्होंने सीबीआई को कहा कि वे अपने अभिभावकों को बुलाना चाहती हैं। इस पर सीबीआई ने अनुमति प्रदान की।
इसके बाद डा. सरोजनी अग्रवाल और अन्य वहां पहुंचे। पूछताछ की गई। पूर्व एमएलसी के आवास पर भी सीबीआई ने छापेमारी की।
कई कागजात जब्त किए। अब नामजद अभियुक्त होने के बाद हिरासत में लिए जाने की संभावना बढ़ गई है।
*सब मानक के अनुसार*
एनसीआर मेडिकल कालेज में सब ठीक है। सीबीआई की कार्रवाई के पहले एनएमसी की टीम ने जांच की थी। जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी की कोई बात नहीं बताई गई।
न तो बच्चों के प्रवेश में किसी प्रकार की गड़बड़ी का मामला है और न ही फैकल्टी को लेकर।
सब कुछ अपडेट है। सीबीआई को सारे कागज भी उपलब्ध कराए गए हैं।
बावजूद इसके सीबीआई की ओर से कोई भी जानकारी मांगी जाएगी तो वह उपलब्ध कराई जाएगी
– *डॉ. सरोजनी अग्रवाल, पूर्व एमएलसी।*