वाराणसी। विशेष न्यायाधीश (एससी एसटी, एक्ट), देवकांत शुक्ला की अदालत ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर टिकट बनाने के मामले में फ़र्ज़ी टीटी को जमनात दे दी। छत्तीसगढ़ निवासी आरोपी आदेश जायसवाल को एक-एक लाख रुपए की दो जमानते एवं बंधपत्र देने पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता वरुण प्रताप सिंह व विनोद कुमार यादव ने पक्ष रखा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार उपनिरीक्षक रविन्द्र कुमार मिश्रा रेलवे स्टेशन पर रात्रि में गस्त हेतु थाने से चलकर PF NO 1 न्यू FOB (फूट ओअर ब्रिज) के पास पहुंचे तथा मुखबीर खास की सूचना पर उसके द्वारा बताये हुये स्थान पर पहुंचे कि रिजर्वेसन काउन्टर जाने वाले रास्ते पर फर्जी आई कार्ड गले में लटकाये आता दिखायी दिया उसे रोककर परिचय पूछा गया तो शकपका गया और बोला कि ट्रेनिग में हूँ। गले में लटकाये आई. कार्ड प्रस्तुत करने हेतु कहा गया तो तत्काल गले से उतार कर दिया। आई कार्ड को देखा गया तो आई कार्ड में नीले रंग की डोरी पर व कार्ड मे पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर लिखा हुआ मिला। शक होने पर आई कार्ड को CIT कार्यालय भेजा गया जहां पर आई कार्ड फर्जी होना बताया गया। कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने बताया कि वह कोई रेलवे कर्मचारी नही है। वह फर्जी टिकट WPS आफिस ऐप डाउन लोड करके अपने मोबाइल फोन पर पुराने कन्फर्म टिकट में ऐडिट करके फर्जी PNR नम्बर यात्री नाम, यात्रा कि ता० ट्रेन का नाम क्रास, सीट नम्बर ऐडिट क्रोमिंग करके यात्रीयों के मोबाइल नम्बर पर वॉट्सएप करके टिकट पर अंकित धनराशी व बनाने का चार्ज नगद व अपने फोन पे नम्बर पर डला लेता है। नाम पता पूछा तो अपना नाम आदर्श जयसवाल निवासी ग्राम /पोस्ट पटेहरा थाना अतरौला जिला रीवा म.प्र० छत्तीसगढ़ बताया। जामा तलाशी पर पहने हुये काले पैन्ट की बायी जेब से एक अदद मोबाइल फोन सैमसंग सिल्वर कलर व TATKAL, Only Northern Railway. का कार्ड लाल कलर का तथा दायी जेब से 570 रुपया बरामद हुआ। बरामद मोबाइल का लाक खुलवाकर फोन पे पर देखा गया जिसमे 17 जून 2025 को समय 12.51 पर 2000/- रुपये व 17 जून 2025 को ही 12.52 Pm पर 1300 रुपया Paid to AADARSH JAISWAL पर प्राप्त होना दर्शा रहा है। फोन पे एकाउन्ट नम्बर पूछा गया तो बताया कि कोटक महिन्द्रा बैंक से एड है। खाता नम्बर तथा बरामद लाल कलर के कार्ड में अंकित नाम (1) दिनेश (2) सीता देवी के मो० नम्बर पर वार्ता किया गया तो दिनेश यादव द्वारा बताया गया कि एक द्वारा उसका तत्काल रिजर्वेसन फार्म भर कर तत्काल टिकट बनाया गया। उसने अपने जानने वाले को भेजा तो उसने बताया कि टिकट फर्जी है। तो उसने इसको पैसा नहीं दिया।