लखनऊ 30 जुलाई:सरकार द्वारा UPPCL निदेशक, वित्त निधि कुमार नारंग के सेवा विस्तार की फ़ाइल वापस करने पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश ने अपर मुख्य सचिव ऊर्जा को एक पत्र भेज कर यह मांग की है कि श्री निधि नारंग के कार्यालय को तत्काल सील किया जाए क्योंकि यह पता चला है कि श्री निधि नारंग निदेशक वित्त के कार्यालय से कई गोपनीय दस्तावेज की फोटो कॉपी करा रहे हैं और उसे बाहर ले जाना चाहते हैं।
अपर मुख्य सचिव ऊर्जा को भेजे गए पत्र में संघर्ष समिति ने लिखा है कि यह विदित हुआ है कि श्री निधि नारंग निदेशक वित्त उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन अपना कार्यकाल न बढ़ाये जाने के आदेश के आने के बाद से अपने कार्यालय में तमाम गुप्त गोपनीय दस्तावेजों की फोटो कॉपी करा रहे हैं। यदि यह सत्य है तो यह बहुत ही गंभीर बात है ।
संघर्ष समिति ने अपर मुख्य सचिव ऊर्जा से मांग की है कि वह इस प्रकरण में तत्काल हस्तक्षेप करने की कृपा करें और श्री निधि नारंग के कार्यालय को तत्काल सील कराने का निर्देश देने की कृपा करें। साथ ही यह सुनिश्चित कराने की कृपा करें कि निदेशक वित्त के कार्यालय से कोई भी गोपनीय दस्तावेज फोटोकॉपी होकर बाहर न जाने पाए जिससे पावर कॉरपोरेशन की गोपनीयता और पारदर्शिता प्रभावित न हो। खासकर ऐसे समय में जब पावर कॉरपोरेशन पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण कर रहा है और श्री निधि नारंग को निजीकरण हेतु बनाई गई टेंडर मूल्यांकन समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।
उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के निदेशक वित्त एवं निजीकरण हेतु बनाई गई टेंडर मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष श्री निधि नारंग का कार्यकाल न बढ़ाये जाने के उत्तर प्रदेश सरकार के निर्णय पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा है कि निदेशक वित्त श्री निधि नारंग द्वारा निजीकरण संबंधी लिऐ गए सभी निर्णयों को तत्काल निरस्त कराने की कृपा करें।
संघर्ष समिति ने यह भी मांग की है कि निदेशक वित्त श्री निधि नारंग के कार्यकाल में लिए गए टैंडर संबंधी सभी वित्तीय फैसलों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए क्योंकि यह चर्चा है कि उनके कार्यकाल में भारी घोटाला हुआ है।
संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु बनाए गए सारे दस्तावेज एक बड़े घोटाले का अंग है अतः निजीकरण की सारी प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जाए और श्री निधि नारंग के कार्यकाल में निजीकरण के नाम पर किए गए सारे घोटाले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु जिस प्रकार से ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति की गई और झूठा शपथ पत्र देने की बात स्वीकार कर लेने के बावजूद ग्रांट थॉर्टन को कंसलटेंट बनाए रखा गया , इसके बाद ग्रांट थॉर्टन को श्री निधि नारंग ने ही क्लीन चिट दिया और ग्रांट थॉर्टन के जरिए निजीकरण के ऐसे दस्तावेज तैयार कराये गए जो कुछ चुनिंदा निजी घरानों को लाभ देने हेतु बनाए गए हैं। निजीकरण की वर्तमान में चल रही सारी प्रक्रिया इन्हीं दस्तावेजों पर आधारित है अतः इसे निरस्त किया जाय।
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 245 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में निजीकरण के विरोध में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
आज वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, हरदुआगंज, जवाहरपुर, परीक्षा, पनकी, ओबरा, अनपरा, और पिपरी में विरोध प्रदर्शन किया गया।
*उपभोक्ता की आवाज समाचार*