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पुलिस महानिदेशक उ०प्र० द्वारा 1930 (National Cybercrime Helpline Number) के नवीन कॉल सेन्टर का उद्घाटन किया गया । - Saty Savera

पुलिस महानिदेशक उ०प्र० द्वारा 1930 (National Cybercrime Helpline Number) के नवीन कॉल सेन्टर का उद्घाटन किया गया ।

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दिनांक 30.07.2025 को राजीव कृष्णा पुलिस महानिदेशक उ0प्र0 द्वारा कल्ली पश्चिम लखनऊ स्थित डीसीपी दक्षिणी के कार्यालय में स्थापित 1930 (National Cybercrime Helpline Number) के नवीन कॉल सेन्टर का उद्घाटन एडीजी साइबर क्राइम श्री बिनोद कुमार सिंह की उपस्थिति में किया गया।
मा० मुख्यमंत्री जी ने साइबर अपराध को राज्य की आंतरिक सुरक्षा और नागरिकों की निजता के लिए एक गंभीर चुनौती मानते हुए इसे सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखा है।
पुलिस महानिदेशक उ0प्र0 द्वारा कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात शासन की उक्त प्राथमिकताओं के क्रम में प्रदेश में बेहतर पुलिसिंग एवं जनता की समस्याओं के दृष्टिगत 10 प्राथमिकतायें निर्धारित की गयी थी जिसमे साइबर क्राइम एक प्रमुख प्राथमिकता है ।
1- साइबर अपराध पंजीकरण हेतु हेल्प लाइन नम्बर )1930) के नवीन काल सेंटर की पृष्ठभूमि
उ0प्र0 में 20 सीटों का साइबर हेल्प लाइन नम्बर 1930 का कॉल सेन्टर यूपी 112 मुख्यालय में क्रियाशील है परन्तु बढ़ती साइबर शिकायतों के दृष्टिगत 30 सीटों का उच्च स्तरीय पृथक नवीन कॉल सेन्टर कल्ली पश्चिम में स्थापित किया गया है । जिसे साइबर क्राइम मुख्यालय द्वारा अल्प अवधि में स्थापित किया गया।
• इस कॉल सेन्टर में 24X7 प्रशिक्षित पुलिस कर्मी वित्तीय साइबर अपराध के पीड़ितों की ऑनलाइन शिकायत दर्ज करेंगे । जिसके लिये आरक्षी से निरीक्षक तक के 94 पुलिस कर्मी नियुक्त किये गये हैं ।
• प्रदेश के साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के पीड़ितों की शिकायतों की सुनवाई हेतु कुल 50 कॉलर हर समय उपलब्ध होंगे ।
• यहां पर दर्ज हुई शिकायतें I4C, साइबर क्राइम मुख्यालय, जनपदीय / कमिश्नरेट साइबर सेल व सम्बन्धित थाने पर प्रदर्शित होने लगेंगी ।
• शीघ्र ही इसी कॉल सेन्टर में I4C की तर्ज पर बैंकों से सहयोग प्राप्त कर CFMC (Cyber Fraud Mitigation Centre) का प्रारम्भ भी किया जाना प्रस्तावित है । इससे एक ही छत के नीचे पुलिस, बैंक व टेलीकाम के कर्मी एक साथ उपलब्ध रहेंगे, जिससे पीडित को तत्काल सहायता मिल सकेगी ।
2- नीतिगत निर्णय
(i) 5 लाख धनराशि की सीमा समाप्त करनाः
पूर्व में प्रचलित व्यवस्था में वर्ष 2020 में परिक्षेत्रीय साइबर क्राइम थाने स्थापित किए गए थे । तत्समय इन थानों में 05 लाख रुपये से अधिक ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के अपराध पंजीकृत तथा स्थानान्तरित होते थे । वर्ष 2023 में शेष जनपदों में 57 नये साइबर क्राइम थाने स्थापित किये गये ।
आम जनमानस के हितों को दृष्टिगत रखते हुए थाने हेतु निर्धारित 05 लाख रुपये की सीमा समाप्त कर दी गयी है तथा अब थानों पर हर प्रकार के ऑनलाइन वित्तीय अपराध पंजीकृत किये जाने के निर्देश दिये गये हैं, ताकि साइबर थानों का समुचित उपयोग सुनिश्चित कर जनता की शिकायतों का त्वरित निस्तारण किया जा सके ।
(ii) साईबर कमांडोः
प्रत्येक जोनल मुख्यालय पर एक प्रशिक्षित अधिकारी “साइबर कमांडो” की नियुक्ति की जा रही है, जो जोन के समस्त जनपदों/ कमिश्नरेट के विवेचकों को जटिल साइबर अपराधों की जांच में सहायता उपलब्ध करायेंगे। वर्तमान में उ0प्र0 के 15 पुलिस कर्मियों द्वारा I4C के माध्यम से संचालित 06 माह का साइबर कमाण्डो कोर्स उच्च शिक्षण संस्थानों से पूर्ण किया गया है ।
(iii) उप-निरीक्षक को विवेचक बनाने हेतु प्रचलित कार्यवाहीः
शासन से पत्राचार कर यह प्रयास किया जा रहा है कि आईटी एक्ट के प्रावधानों में बदलाव कर साइबर अपराधों की विवेचना हेतु विवेचनाधिकारी निरीक्षक (Inspector) स्तर से घटाकर उप-निरीक्षक (Sub-Inspector) स्तर तक कर दिया जाये, जिससे एफआईआर पंजीकरण एवं मामलों के शीघ्र निस्तारण को सुनिश्चित किया जा सके।
(iv) पीड़ितों की धनराशि बिना एफआईआर लौटाने हेतु किए जा रहे प्रयासः
माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में वित्तीय साइबर अपराध में CFCRRMS (Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System) के माध्यम से फ्रीज धनराशि को शीघ्र बिना प्रथम सूचना रिपोर्ट के मात्र पीड़ितों के प्रार्थना पत्र पर पीड़ितों तक पहुंचाने के लिए उ०प्र० शासन द्वारा प्रेषित प्रस्ताव विचाराधीन है ।
(V) नोडल अधिकारी- प्रत्येक जनपद कमिश्नरेट में अपर पुलिस अधीक्षक/ डीसीपी स्तर के अधिकारी को साईबर अपराध हेतु नोडल अधिकारी नियुक्त कर उनके दायित्वों का स्पष्ट रूप से निर्धारण किया जायेगा ।
2- बुनियादी ढांचा / संस्थागत (Infrastructure / Institutional)
एक त्रिस्तरीय साइबर जांच एवं डिजिटल सहायता प्रयोगशाला (Cyber Investigation and Digital Assistance Lab)-मुख्यालय, रेंज / कमिश्नरेट और जनपद स्तर पर प्रस्तावित की जा रही है, जो प्रदेश में साइबर अपराधों की जांच एवं उनके निस्तारण की गति को अत्यंत तीव्र कर देगी ।
3- प्रशिक्षण (Training)
• उत्तर प्रदेश में हर स्तर के पुलिस अधिकारियों को Peer Learning सेशन के माध्यम से ऑनलाइन तथा NCTC (National Cybercrime Training Centre), CFSL (Central Forensic Science Laboratory) से निरन्तर प्रशिक्षण प्राप्त कराया जा रहा है एवं भविष्य में योजनाबद्ध तरीके से साइबर प्रशिक्षण प्रारंभ किया जा रहा है।
• प्रदेश में कुल 11,683 पुलिस कर्मियों द्वारा I4C द्वारा संचालित CyTrain Portal के माध्यम से साइबर प्रशिक्षण के विभिन्न स्तरीय 38,550 सर्टिफिकेट प्राप्त किये गये हैं।
4- साइबर जागरुकता (Cyber Awareness)
माह के प्रत्येक प्रथम बुधवार को साइबर जागरुकता दिवस के रुप में मनाया जा रहा है । उ०प्र० पुलिस को उनके स्थानीय सीमा के अन्तर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों, नगर निकायों, गैर सरकारी संगठनों, नागरिक सामाजिक संगठनों, डिजिटल वालंटियर, ग्राम मोहल्ले के निवासियों आदि से समन्वय कर सहयोग प्राप्त कर साइबर जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किये जाने के निर्देश दिये गये हैं ।

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