सिर्फ़ एक घंटे में पुलिस ने खोज निकाली मासूम आरुषि – मिशन शक्ति टीम की फुर्ती और फर्ज़ का लोहा मान गया उन्नाव

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उन्नाव की सड़कों पर आज एक माँ की चीखें गूंज उठीं, आँखें रो-रोकर सूज गईं थीं, दिल बेसब्र था – क्योंकि उसकी मासूम बच्ची आरुषि अचानक ग़ायब हो गई थी। लेकिन इस दर्दनाक पल में जिस तत्परता और संवेदनशीलता के साथ *सफीपुर थाना की मिशन शक्ति टीम* हरकत में आई, उसने साबित कर दिया कि *उत्तर प्रदेश पुलिस सिर्फ़ वर्दी नहीं, जिम्मेदारी की पहचान है।*

*घटना क्या थी?*

रामकांति, पत्नी रामसेवक, शुक्रवार को टैम्पो से अपने मायके पंडितखेड़ा (सफीपुर) जा रही थीं। सफर के दौरान मोहम्मदखेड़ा गांव के तकिया चौराहे पर एक अनजान महिला के पास अपनी छोटी बच्ची आरुषि को बैठाकर वह मोबाइल लेने टैम्पो से उतरीं। कुछ ही पलों में वह लौटीं — लेकिन *आरुषि ग़ायब थी!*

*चीख पुकार सुनते ही हरकत में आई पुलिस*

आसपास खड़ी *मिशन शक्ति टीम*, जिसमें तेजतर्रार उपनिरीक्षक *श्री संजय कुमार पांडेय* और महिला पुलिसकर्मी शामिल थीं, ने मामले की गंभीरता को भांपते ही समय बर्बाद किए बिना एक्शन लिया। न कोई कागजी खानापूरी, न कोई टालमटोल — सीधा *मिशन मोड* में जुट गई पुलिस।

*तकनीक और टीमवर्क का कमाल*

पुलिस ने तत्काल टीम बनाकर मोहल्ले के कोने-कोने में तलाशी शुरू की। आसपास के *CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली*, चौराहों से लेकर गलियों तक जमीनी खोजबीन शुरू हुई। और महज *60 मिनट* के भीतर वो पल आया, जिसने सबकी साँसों को राहत में बदला —
🌸 *गुलाब बिल्डिंग के पास एक कोने में सकुशल बैठी मिली नन्हीं आरुषि।*

माँ ने दौड़कर बेटी को गले लगाया — वो आलिंगन, वो आँसू, वो मुस्कान… मानो इंसाफ़ ने खुद चलकर दस्तक दी हो।

*जनता में गूंजा एक ही नाम – ‘सफीपुर पुलिस’*

इस तेज़ और मानवीय कार्रवाई ने ना सिर्फ़ एक माँ को उसकी बच्ची से मिलाया, बल्कि समाज में *पुलिस के प्रति भरोसे की लौ* को और प्रज्वलित किया। स्थानीय लोगों ने मिशन शक्ति टीम की सराहना करते हुए कहा:

*”ऐसी पुलिस पर गर्व है, जो सिर्फ़ कानून नहीं, इंसानियत भी निभाती है।”*

🛡️ *एक मिशन, एक जज़्बा – उत्तर प्रदेश पुलिस*

*सिर्फ़ अपराध से लड़ना नहीं, हर मासूम की मुस्कान बचाना है हमारी ड्यूटी।*

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