आजमगढ़ मुख्य अभियंता का आदेश ठंडे बस्ते में: 5 साल से जमे मनीष कुमार जायसवाल पर मनमानी, उपभोक्ताओं से बदसलूकी और संविदा कर्मियों के शोषण के आरोप

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क्या अधिशासी अभियंता आदेश से ऊपर हैं?

आज़मगढ़।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के मुख्य अभियंता (वितरण) द्वारा 23 अप्रैल 2025 को शिविर सहायक ग्रेड-2 मनीष कुमार जायसवाल का स्थानांतरण आदेश जारी किया गया था। लेकिन अधिशासी अभियंता कप्तानगंज ने रिपोर्टर से कहा– “अभी ट्रांसफर की आवश्यकता नहीं है।” आदेश 5 महीनों बाद भी लागू नहीं हो पाया।

गंभीर आरोप

उपभोक्ताओं की शिकायतों को दबाकर रखना और उपभोक्ताओं से अभद्र व्यवहार।

आधे दामों पर बिल माफ करने का खेल।

संविदा कर्मियों से दुर्व्यवहार और शोषण।

विभागीय राजस्व को लगातार नुकसान पहुँचाना।

अपने घर से महज़ 10 किलोमीटर दूरी पर 5 साल से जमे रहना।

संविदा कर्मियों का आरोप 👇

कप्तानगंज के संविदा कर्मियों ने खुलासा किया कि विभाग द्वारा लापरवाही में कार्य से हटाए गए एक व्यक्ति निशांत यादव को मनीष कुमार जायसवाल ने अधिशासी अभियंता से साइन और मोहर करवा कर, ऊपर के अधिकारियों से अनुमोदन दिलवाकर वापस रख लिया।
जबकि अच्छे और निर्दोष संविदा कर्मचारियों के लिए कभी कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
संविदा कर्मियों का कहना है– “निशांत यादव ने शायद मनीष कुमार जायसवाल को कुछ आर्थिक लाभ पहुँचाया होगा, तभी उसकी बहाली हो गई। हम लोग रोज इनके दफ्तर और अधिशासी अभियंता के पास न्याय की गुहार लगाते रहे, लेकिन हमें केवल निराशा ही मिली।”

बड़ा सवाल👇
क्या सरकारी विभाग में मनचाहे लोगों को आर्थिक लाभ के आधार पर बचाया और बहाल किया जाएगा, जबकि ईमानदार और मेहनती संविदा कर्मियों की आवाज़ दबा दी जाएगी?
क्या मुख्य अभियंता आजमगढ़ राम बाबू का आदेश अधिशासी अभियंता की मनमानी में दफन होता रहेगा?

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