टोल प्लाजा के पास मिले 100 हेक्टेयर जमीन तो बने बात
जिला प्रशासन द्वारा चिह्नित जमीन यूपीडा पहले ही कर चुका है खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी
आजमगढ़। उप्र सरकार की वन ट्रिलियन डालर अर्थव्यवस्था की मुहिम को रफ्तार देने के लिए पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे किनारे औद्योगिक गलियारा बनाने की योजना जनपद में अभी तक खटाई में पड़ी हुई है। क्योंकि अभी तक यूपीडा को उसके मन मुताबिक जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है। पहले की चिह्नित जमीन को यूपीडा पहले ही खारिज कर चुका है। अब 100 से 500 हेक्टेयर भूमि उसे टोल प्लाजा के करीब मिले तो जनपद में औद्योगिक गलियारे का विकास हो।
आजमगढ़ जनपद को पहले से ही उद्योग शून्य जनपद होने का तमगा मिला हुआ है। जनपद में एकमात्र औद्योगिक इकाई दि किसान सहकारी चीनी मिल लिमिटेड सठियांव हैं। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के निर्माण के दौरान सरकार की ओर से इसके किनारे औद्योगिक गलियारे के विकास की बात कही गई। जिसके तहत जिला प्रशासन की ओर से फूलपुर तहसील के खुरचंदा में लगभग 150 एकड़ और तहसील सदर के चकतगे में 54.340 एकड़ भूमि का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया था। यूपीडा के एसडीएम कोमल यादव जब इन जमीनों का निरीक्षण करने आए तो उन्होंने इन जमीनों के मालिक किसानों से बात की लेकिन कोई किसान जमीन देने को तैयार नहीं हुआ। वहीं जिन जमीनों का प्रस्ताव दिया गया था, वह जमीन टोल प्लाजा से काफी दूर थी। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर पहुंचने में अलग से एक मार्ग का निर्माण करना पड़ता। इसे देखते हुए यूपीडा ने इसे खारिज कर दिया। इसी बीच से शासन की ओर से सुल्तानपुर और गाजीपुर सहित अन्य जनपदों में औद्योगिक गलियारे के विकास की घोषणा की। लेकिन जनपद में जमीन न मिलने के कारण यह कार्य अधर में लटक गया। हालांकि अभी इस प्रस्ताव को खारिज नहीं किया गया है। अगर प्रशासन टोल प्लाजा के पास एक किमी परिधि में कहीं जमीन उपलब्ध कराता है तो औद्योगिक गलियारे का विकास हो सकता है।
अभी तक आजमगढ़ में औद्योगिक गलियारे के विकास की संभावना से इंकार नहीं है। लेकिन प्रशासन इसमें दिलचस्पी दिखाए और हमें टोल प्लाजा से एक किमी परिधि में 100 से 500 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराए तो हम औद्योगिक गलियारे का विकास कर सकते हैं।
– कोमल यादव, एसडीएम यूपीडा।