बलिया
पत्रकारिता जिसे कभी लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा गया था अब कुछ लोगों के हाथों में गिरवी सी नजर आने लगी है। मानव धर्म प्रसार सेवी संस्था के जिला संयोजक विनोद यादव उर्फ “मानव” जी ने बेल्थरा रोड तहसील के एक कथित पत्रकार की करतूतों का ऐसा चिट्ठा खोला है,जिसने पत्रकारिता की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विनोद “मानव”जो कभी उसी प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र में कार्यरत थे,ने खुलासा किया कि बेल्थरा रोड के उस संवाददाता ने न सिर्फ क्षेत्र के लोगों और संस्थाओं से उगाही की,बल्कि अपने ही साथी कर्मियों के हक पर भी डाका डाल दिया।
उन्होंने बताया कि जब वे उस समाचार पत्र में कार्यरत थे,तो उन्हें मिलने वाले 7000 रुपये के मानदेय में से 2000 रुपये हर महीने कमीशन के नाम पर काट लिए जाते थे।
“मुझे हर महीने केवल 5000 रुपये ही दिए जाते थे, जबकि कंपनी 7000 रुपये का भुगतान करती थी,”विनोद मानव ने कहा। उन्होंने दावा किया कि इस बेईमानी के चलते उन्हें लगभग एक लाख रुपये का नुकसान हुआ।
विनोद मानव के अनुसार,इस धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब वे दैनिक समाचार पत्र के वाराणसी कार्यालय पहुंचे और वहां की भुगतान सूची देखी। “सच्चाई सामने आने के बाद मैंने उस पत्रकार से किनारा कर लिया। लेकिन उसे यह बात नागवार गुज़री,”उन्होंने बताया।
विनोद मानव ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बदले की भावना से उस संवाददाता ने तत्कालीन थानाध्यक्ष से मिलकर उनके ऊपर झूठे आरोप लगवाए और उन्हें ‘मिनी गुंडा एक्ट (110 जी)’ के तहत जेल भिजवाया गया। “मैंने बेगुनाही में 74 दिन जेल में बिताए। यह मेरे जीवन का सबसे कष्टदायक दौर था उन्होंने कहा।
उन्होंने आगे बताया कि सत्य की जीत अंततः हुई और दैनिक समाचार पत्र प्रबंधन ने जांच के बाद उस संवाददाता को सेवा से बाहर का रास्ता दिखा दिया। लेकिन,कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
विनोद मानव के अनुसार,उक्त संवाददाता ने अपनी पुरानी चालों पर लौटते हुए एक फर्जी न्यूज़ चैनल “R न्यूज़ मंच” के नाम से उगाही का नया जाल बिछा लिया है। “वह अब भी क्षेत्रीय लोगों और संस्थाओं से विज्ञापन और कवर करने के नाम पर पैसे वसूल रहा है,उन्होंने खुलासा किया।
उन्होंने दावा किया कि इस फर्जी चैनल का कोई सरकारी पंजीकरण नहीं है और यह सिर्फ लोगों से धन उगाही का जरिया बना हुआ है। “जिस व्यक्ति को नंबर वन अखबार से बर्खास्त किया जा चुका है,वह अब झूठ की दुकान चलाकर ईमानदार पत्रकारों की छवि को धूमिल कर रहा है,विनोद मानव ने कहा।
उन्होंने क्षेत्र के नागरिकों, व्यापारियों और सामाजिक संस्थाओं से अपील की है कि वे ऐसे लोगों के झांसे में न आएं और किसी तरह का विज्ञापन या आर्थिक सहयोग न दें।“सत्य की आवाज दबाई जा सकती है, मिटाई नहीं जा सकती। पत्रकारिता को स्वच्छ बनाए रखना हर जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है,”उन्होंने कहा।
विनोद मानव का यह बयान क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। लोग पूछ रहे हैं — क्या बेल्थरा रोड में पत्रकारिता के नाम पर चल रहा यह खेल अब खत्म होगा, या फिर ‘फर्जी चैनलों’ की यह परंपरा यूं ही जारी रहेगी?
सवाल उठ रहा है कि जब सत्य कहने वाले को जेल भेजा जा सकता है, तो झूठ फैलाने वालों पर कार्रवाई कब होगी?
बेल्थरा रोड की यह कहानी केवल दो व्यक्तियों की नहीं, बल्कि उस सच्चाई की है जो दिखाती है कि ईमानदार पत्रकारों को किस तरह दबाया जाता है और फर्जी पत्रकार किस तरह फलते-फूलते हैं।
विनोद मानव के इस खुलासे ने न सिर्फ बेल्थरा रोड बल्कि पूरे बलिया जिले में पत्रकारिता की साख और उसकी पारदर्शिता पर नई बहस छेड़ दी है।अब देखना यह है कि क्या प्रशासन ऐसे कथित पत्रकारों के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाता है या नहीं।
विनोद मानव एक अच्छे समाजिक कार्यकर्ता गरीबों, मजलूमों के मसीहा के रूप में जाने जाते है।
विनोद मानव शिक्षा एक समान की भी लड़ाई लड़ रहे हैं कई राज्यों में दंडवत मार्च भी कर चुके है कि शिक्षा एक समान हो।