सत्य सवेरा संवाददाता अम्बेडकरनगर
अम्बेडकर नगर जिले की तहसील आलापुर स्थित खाद्य रसद आपूर्ति विभाग में अव्यवस्थाओं और मनमानी का आलम लगातार बढ़ता जा रहा है। विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, सप्लाई इंस्पेक्टर अजय कुमार वर्मा (आपूर्ति निरीक्षक) की देखरेख में पात्र राशन कार्ड धारकों के नाम जोड़ने और संशोधन के कार्य में भारी अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि राशन कार्ड में नए नाम जोड़ने, यूनिट अपडेट करने, संशोधन और ऑनलाइन कार्यों के लिए विभाग में तैनात कम्प्यूटर ऑपरेटरों द्वारा खुलेआम सुविधा शुल्क की मांग की जाती है। बिना भुगतान के न तो आवेदन स्वीकार किए जाते हैं और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई होती है, जिससे जनता भारी परेशान है।तीन कम्प्यूटर ऑपरेटर तैनात, फिर भी जनता बेहाल।खाद्य रसद विभाग में कुल तीन कम्प्यूटर ऑपरेटर पद पर कार्यरत हैं 1. अजीत यादव बड़े बाबू एवं सरकारी कम्प्यूटर ऑपरेटर 2. अखिलेश गुप्ता कम्प्यूटर ऑपरेटर 3. प्रवेश कुमार कम्प्यूटर ऑपरेटर
।ग्रामीणों का आरोप है कि तीन–तीन कम्प्यूटर ऑपरेटर होने के बावजूद विभागीय कार्यों में ढिलाई, देरी और सुविधा शुल्क की वसूली लगातार जारी है। बताया जा रहा है कि अजीत यादव सहित अन्य ऑपरेटरों की मनमानी के कारण पात्र लाभार्थियों के राशन कार्ड में नाम जोड़ने के कार्य रुक जाते हैं या महीनों तक लंबित पड़े रहते हैं।ग्रामीणों ने यह भी बताया कि विभाग में काम सिर्फ उन्हीं का होता है जो सुविधा शुल्क देने को मजबूर होते हैं। जो लोग शुल्क देने में सक्षम नहीं हैं, उनके आवेदन पर महीनों तक कोई कार्रवाई नहीं होती परिणामस्वरूप अनेक परिवार अभी भी राशन सुविधा से वंचित हैं।जानकारी मांगने पर भी मिलती है टालमटोल।लाभार्थियों का कहना है कि जब वे विभागीय कार्यों राशन कार्ड सुधार यूनिट जोड़ने घटाने या आवश्यक सूचनाओं के संबंध में पूछताछ करते हैं।तब भी कंप्यूटर ऑपरेटर मनमाने ढंग से व्यवहार करते हैं। कई लोगों ने आरोप लगाया है कि जानकारी देने से पहले उनसे सुविधा शुल्क की मांग की जाती है जिससे ग्रामीण बेहद असहाय महसूस कर रहे हैं।जनता प्रशासन से कर रही सख्त उच्च अधिकारियों द्वारा जांच कर उचित जनता कार्रवाई की मांग।पीड़ित ग्रामीणों और राशन कार्ड धारकों ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि ।विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार पर तुरंत रोक लगाई जाए।सुविधा शुल्क लेने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाए,और पात्र लाभार्थियों को बिना भ्रष्टाचार के उनके हक का राशन और सरकारी सुविधाएं दिलाई जाएं।जनता का कहना है कि जब तक विभाग में तैनात कर्मचारी और अधिकारी जवाबदेह नहीं बनेंगे, तब तक ऐसी अनियमितताएं और मनमानी यूं ही जारी रहेंगी।