जर्जर सरकारी आवास में रहने को मजबूर स्वास्थ्य कर्मी, संग्रामपुर में जोखिम भरे भवनों में गुज़र रही ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की रातें

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अमेठी। संग्रामपुर स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत कर्मचारियों की स्थिति बदहाल होती जा रही है। अस्पताल परिसर में बने सरकारी आवास इतने जर्जर हो चुके हैं कि उनमें रहना खुद की जान से खिलवाड़ करने जैसा है। फिर भी मजबूरी में एंबुलेंस चालक, ईएमटी, लैब टेक्नीशियन, वार्ड बॉय, अकाउंटेंट सहित कई कर्मचारी इन्हीं खस्ताहाल भवनों में रहने को विवश हैं।

जानकारी के अनुसार पूर्व सीएमओ द्वारा वर्ष 2021 में इन आवासों को निष्प्रयोज्य घोषित करते हुए ध्वस्तीकरण हेतु चिन्हित कर दिया गया था, लेकिन चार वर्ष बीत जाने के बाद भी भवनों का न तो पुनर्निर्माण हो सका और न ही नया आवास उपलब्ध कराया गया। परिणामस्वरूप कर्मचारी आज भी जोखिम भरी परिस्थिति में रह रहे हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि भवनों की छतों से लगातार मोरंग व बालू गिरती रहती है। लोहे की सरिया तक बाहर नजर आती है। बरसात के दौरान छत से पानी टपकने के कारण कमरे रहने लायक नहीं बचते। इसके बावजूद ड्यूटी की बाध्यता के चलते उन्हें इन्हीं आवासों में दिन–रात गुजारना पड़ता है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संग्रामपुर के प्रभारी, डॉ. संतोष सिंह ने बताया कि जर्जर भवनों की स्थिति से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। लेकिन नए आवास उपलब्ध न होने के कारण कुछ स्वास्थ्यकर्मी मजबूरी में पुराने भवनों में रह रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू बनाए रखने के लिए कर्मचारियों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना आवश्यक है। कर्मचारियों की सुरक्षा को नजरअंदाज करते हुए उन्हें खतरनाक भवनों में रहने के लिए छोड़ देना गंभीर लापरवाही है।

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