सत्य सवेरा संवाददाता जौनपुर
जौनपुर जनपद
बसपा वाराणसी मंडल ऑर्डिनेटर अनिल गौतम इन दिनों राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में हैं। सोशल मीडिया पर उनकी भाजपा नेताओं के साथ वायरल हो रही तस्वीरों ने बसपा संगठन के भीतर ही असहजता पैदा कर दी है। सवाल यह उठ रहा है कि जब बसपा प्रमुख मायावती विपक्षी दलों के कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखने की कड़ी नीति पर जोर देती हैं, तो उसी पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी भाजपा नेताओं से नजदीकियां क्यों बढ़ा रहे हैं।हाल ही में सामने आई तस्वीर में अनिल गौतम को भाजपा के एक प्रमुख नेता, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य तथा व्यापार प्रकोष्ठ से जुड़े पदाधिकारी और शाहगंज ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि विजय सिंह विद्यार्थी के साथ देखा गया। दोनों नेताओं की मुलाक़ात को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाक़ात को चुनावी मौसम से पहले संभावित सियासी हलचल के संकेत के रूप में देख रहे हैं।पार्टी के कई कार्यकर्ताओं ने इस घटनाक्रम पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि बसपा की विचारधारा सदैव भाजपा से दूरी बनाए रखने की रही है, लेकिन कुछ पदाधिकारी बार-बार इस लाइन से हटकर पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यही कारण है कि अक्सर विपक्ष बसपा को भाजपा की “B टीम” कहकर निशाना साधता रहा है।सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व भी इस मामले को गंभीरता से देख रहा है। बसपा प्रमुख मायावती की कड़ी अनुशासनात्मक नीति के तहत यह मामला उनके संज्ञान में पहुंच चुका है और आने वाले दिनों में इस पर कार्रवाई की संभावना से इंकार नहीं किया जा रहा है।स्थानीय राजनीतिक हलकों का कहना है कि ऐसे घटनाक्रम न केवल पार्टी की साख को प्रभावित करते हैं, बल्की कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी असर डालते हैं। लगातार उठते सवालों ने बसपा की रणनीतिक स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बसपा नेतृत्व इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है। क्या पार्टी सख्त कदम उठाएगी या मामला यूं ही ठंडे बस्ते में चला जाएगा फिलहाल राजनीतिक तापमान इसी मुद्दे पर गर्म बना हुआ है।