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श्रद्धा और भक्ति से गुंजा ठेंगहा, जड़भरत–रहूगढ़ संवाद व गजेंद्र मोक्ष प्रसंग ने छुआ श्रद्धालुओं का हृदय - Saty Savera

श्रद्धा और भक्ति से गुंजा ठेंगहा, जड़भरत–रहूगढ़ संवाद व गजेंद्र मोक्ष प्रसंग ने छुआ श्रद्धालुओं का हृदय

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संग्रामपुर। ग्रामसभा ठेंगहा में चल रही श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह का चौथा दिवस गुरुवार को अत्यंत भावपूर्ण और आध्यात्मिक वातावरण में सम्पन्न हुआ। जड़भरत–रहूगढ़ संवाद, विभिन्न नर्कों का वर्णन और गजेंद्र मोक्ष के पावन प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।

कथा वाचक आचार्य पंडित शिव शंकर त्रिपाठी जी महाराज ने भागवत के गूढ़ तत्वों का सरल, प्रभावशाली और भावनात्मक वर्णन करते हुए कहा कि जड़भरत–रहूगढ़ संवाद मनुष्य को अहंकार से दूर रहने और कर्तव्य व आत्मज्ञान के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। जड़भरत की निर्विकार स्थिति और रहूगढ़ के प्रश्नों के समाधान ने श्रोताओं को धर्म के वास्तविक स्वरूप से अवगत कराया।

इसके बाद आचार्य जी ने विभिन्न नर्कों का विस्तृत वर्णन करते हुए कहा कि हर पाप का फल निश्चित है। अधर्म, हिंसा, छल-कपट और विषय वासनाएँ मनुष्य को पतन की ओर ले जाती हैं, जबकि सद्कर्म, संयम, करुणा और सेवा जीवन को पवित्र बनाते हैं। इस प्रसंग को सुनकर कई श्रद्धालुओं ने मन से बुराइयों को त्यागने का संकल्प लिया।

दिन का मुख्य आकर्षण रहा गजेंद्र मोक्ष का दिव्य प्रसंग। आचार्य जी ने बताया कि कैसे भक्त गजेंद्र की करुण पुकार पर भगवान विष्णु तत्क्षण प्रकट हुए और उसे मोक्ष प्रदान किया। यह प्रसंग भक्ति, विश्वास और ईश्वर की अनुकम्पा का अनुपम उदाहरण है। गजेंद्र की हृदयस्पर्शी स्तुति सुनकर कई श्रद्धालुओं की आँखें नम हो गईं और पूरा पंडाल हरे राम–हरे कृष्ण के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।

कार्यक्रम में जगदीश नारायण अग्रहरि, विपिन बिहारी पाण्डेय, हरि बक्स सिंह, रणजीत सिंह, कपिल बरनवाल, सत्य प्रकाश ओझा, सूरज सिंह, हुकुम चन्द्र, यज्ञ नारायण तिवारी, रघुनाथ पाण्डेय, लक्ष्मी कांत, शेषधर तिवारी, राम लखन, शिव बहादुर यादव, बजरंग प्रसाद, चित्रकूट मणि, राधेश्याम तिवारी, महादेव बरनवाल सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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