बलिया। कुंवर सिंह चौराहे पर स्थित एक चाय की दुकान पर आज शाम दो पुलिसकर्मियों (दीवानों) की बातचीत स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई। स्थानांतरण और रवानगी से जुड़ी इस बातचीत ने पुलिस विभाग के अंदर चल रही व्यवस्थागत दिक्कतों को उजागर कर दिया।
एक दीवान ने बताया कि उनका गैर-जनपद स्थानांतरण वर्ष 2025 में ही हो गया था। इसके बावजूद रिलीविंग की तारीख काफी देर से तय हुई और एसपी बलिया द्वारा रवानगी की तिथि 01 दिसंबर 2025 निर्धारित की गई।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि तिथि तय होने के बाद भी आरआई साहब द्वारा रवानगी की अंतिम अनुमति अब तक नहीं दी गई, जिससे उनकी स्थिति पहेली जैसी हो गई है।
दीवान ने बताया कि उनका बैरक (बिस्तर) थाने पर है, जबकि नई ड्यूटी पुलिस लाइन में लग गई है। थाना और पुलिस लाइन के बीच लगभग 40–45 किलोमीटर की दूरी होने के कारण उन्हें रोजाना आने-जाने में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। साथ में तैनात अहमद साहब भी इसी दूरी की वजह से प्रतिदिन कई घंटे सड़क पर बिता रहे हैं।
अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए पुलिसकर्मी ने कहा—
“रवानगी में देरी, ड्यूटी पर संकट — अब पुलिसकर्मी पूछ रहे, ‘गुहार आखिर किससे लगाएँ?’”
स्थानीय पुलिसकर्मी बताते हैं कि आदेश एक तरफ जारी है और रवानगी दूसरी तरफ अटकी हुई है, जिससे न तो पुरानी जगह की ड्यूटी सहज चल पा रही है और न ही नई जगह पर कार्य सुचारू हो पा रहा है। विभागीय असमंजस ने उन्हें मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से परेशान कर रखा है।
सूत्रों का कहना है कि मामला आरआई कार्यालय और पुलिस लाइन प्रशासन के बीच किसी तकनीकी प्रक्रिया में अटक गया है, जिसके चलते फाइनल रिलीविंग रोक दी गई है।
पीड़ित पुलिसकर्मियों ने उम्मीद जताई है कि वरिष्ठ अधिकारी शीघ्र हस्तक्षेप करेंगे ताकि उन्हें इस असहज स्थिति से राहत मिल सके।